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आर्मेनिया का चुनाव ट्रंप और पुतिन के लिए कैसे बना सिरदर्द? खुफिया साइबर ऑपरेशन से वोटरों के इंपोर्ट को दिया जा रहा अंजाम

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रूस, तुर्किए, ईरान और अजरबैजान से घिरे यूरोप के एक देश आर्मेनिया में अगले महीने के पहले हफ्ते के आखिर में 7 जून, 2026 को संसदीय चुनाव का आयोजन हो जा रहा है. इस संसदीय चुनाव को लेकर पश्चिमी खुफिया अधिकारियों का कहना है कि यह चुनाव अब वाशिंगटन और मॉस्को यानी डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच एक प्रॉक्सी मुकाबला बन चुका है.

दरअसल, आर्मेनिया के वर्तमान PM निकोल पाशिन्यान, जो इस वक्त जनता की पसंद में आगे चल रहे हैं, पिछले छह सालों से आर्मेनिया की रूस पर निर्भर रहने वाली नीति को खत्म करने में लगे हुए हैं. इसी हफ्ते छपी रॉयटर्स की एक स्पेशल जांच रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की पुतिन शासन पाशिन्यान को चुनाव में हराने के लिए एक खुफिया अभियान चला रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (27 मई, 2026) को सार्वजनिक रूप से पाशिन्यान के फिर से चुनाव लड़ने का समर्थन किया है.  

क्रेमलिन ने आर्मेनिया में निगरानी के लिए बनाया नया विभाग

रॉयटर्स ने पांच पश्चिमी खुफिया अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया, रूस ने अक्टूबर में ‘डायरेक्टरेट फॉर स्ट्रैटेजिक कोऑपरेशन एंड पार्टनरशिप’ नामक एक नया विभाग बनाया, जो आर्मेनिया में इस इन्फ्लूएंस ऑपरेशन की निगरानी कर रहा है. इस ऑपरेशन का संचालन सोशल डिजाइन एजेंसी (SDA) कर रही है, जो क्रेमलिन की तरफ से फंडेड संगठन है. इस संगके लेखक, अनुवादक और वीडियो निर्माता पूरे यूरोप में प्रचार अभियानों में शामिल रहे हैं.

वोटरों को उड़ाकर लाने की योजना

इस कथित खुफिया ऑपरेशन का सबसे बड़ा हिस्सा सिर्फ ऑनलाइन प्रचार नहीं, बल्कि लोगों को सीधे चुनाव में शामिल करना है. रॉयटर्स के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने रूस में रहने वाले हजारों आर्मेनियाइयों को आर्मेनिया लाकर पाशिन्यान के खिलाफ मतदान कराने पर चर्चा की है. दरअसल, आर्मेनियाई नागरिक विदेश से रहकर वोटिंग नहीं कर सकते, उन्हें मतदान के लिए अपने देश में मौजूद होना अनिवार्य है. 

रूस में आर्मेनियाई प्रवासियों की संख्या 20 लाख से अधिक मानी जाती है और दोनों देशों के बीच रोज दर्जनों उड़ानें संचालित होती हैं. तीन खुफिया अधिकारियों के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने 1 लाख मतदाताओं को आर्मेनिया लाने की अनुमानित लागत करीब 5 करोड़ डॉलर आंकी थी.

क्या खोने से डर रहा मॉस्को?

दरअसल, रूस ने आधिकारिक माध्यमों से भी दबाव बनाते हुए धमकी दी है कि अगर आर्मेनिया रूस से दूर जाता है तो उसे सस्ती नैचुरल गैस की आपूर्ति खोनी पड़ सकती है. इसके साथ ही आर्मेनियाई फल, सब्जियां, फूल और ब्रांडी के आयात पर भी बैन लगाए जा सकते हैं. थॉमस डी वाल ने रॉयटर्स से कहा कि पाशिन्यान जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वह रूस के लिए खतरा है. उन्होंने कहा कि आपूर्ति के स्रोतों को डाइवरसिफाई करना उस वर्चुअल एकाधिकार को खत्म कर देता है जो रूस ने आर्मेनिया पर बना रखा था.

रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी सरकार के कुछ हिस्सों, जिनमें CIA भी शामिल है, ने हाल के सालों में गुप्त रूप से पाशिन्यान की सुरक्षा में मदद की है. CIA ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन रूस के विदेश मंत्रालय ने इन सभी हस्तक्षेप आरोपों को जासूसी उन्माद करार दिया है.

यह भी पढ़ेंः 300 अरब डॉलर का निवेश और होर्मुज स्ट्रेट में स्वतंत्र नौवहन… US-ईरान के बीच सीजफायर के लिए क्या-क्या रखे गए प्रस्ताव?

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