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ईरान ने अमेरिका के साथ फिर शुरू की जंग तो भड़का पाकिस्तान, एक्सपर्ट बोले- ‘ये ताकत नहीं, बल्कि…’

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Islamabad MoU: अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने इस्लामाबाद समझौते (Islamabad MoU) के तहत अपनी सभी जिम्मेदारियां फिलहाल रोक दी हैं. ईरान के इस फैसले पर पाकिस्तान से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है. पाकिस्तान के सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ और भू-राजनीतिक विश्लेषक अली के. चिश्ती ने इसे “लापरवाह और खतरनाक फैसला” बताया है. उनका कहना है कि इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा और सबसे ज्यादा नुकसान ईरान की जनता को होगा.

 

ईरान ने समझौते से पीछे हटने की वजह क्या बताई?

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने फार्स न्यूज एजेंसी से कहा कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान ही इस्लामाबाद समझौते का उल्लंघन किया. ऐसे में ईरान अब अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रहा है. वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान तभी इस समझौते का पालन करेगा, जब अमेरिका भी अपनी शर्तों का पालन करेगा. उनका साफ कहना था कि समझौता सिर्फ एक पक्ष पर लागू नहीं हो सकता.

पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने क्या कहा?

पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञ अली के. चिश्ती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान का इस्लामाबाद समझौते से पूरी तरह पीछे हटना बहुत गलत फैसला है. उनके मुताबिक, इस समझौते से दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता था, ईरान को प्रतिबंधों में राहत मिल सकती थी, तेल निर्यात में छूट मिलती और बातचीत का रास्ता खुला रहता. उन्होंने कहा कि लड़ाई का रास्ता चुनना ताकत नहीं, बल्कि ऐसा कदम है जिससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी, पूरे इलाके में अस्थिरता फैलेगी और सबसे ज्यादा परेशानी ईरान की आम जनता को होगी.

ट्रंप पहले ही समझौता खत्म बता चुके थे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान कहा था कि इस्लामाबाद समझौता अब खत्म हो चुका है. उन्होंने इसकी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर ईरान के साथ बढ़ता विवाद बताया था.

अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव

शनिवार को अमेरिका ने ईरान के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में कई सैन्य ठिकानों और लॉजिस्टिक केंद्रों पर हवाई हमले किए. इनमें यज़्द और अहवाज़ के आसपास के इलाके भी शामिल थे. इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए.

60 दिन का युद्धविराम भी टूटा

इस्लामाबाद समझौते में 60 दिनों तक लड़ाई रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और स्थायी समाधान के लिए बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी थी. लेकिन अब दोनों देशों के बीच फिर से हमले शुरू हो गए हैं. ऐसे में यह समझौता लगभग खत्म होता नजर आ रहा है और पूरे मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है.

 

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