संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार से होने जा रही है। इससे पहले रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक हुई। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और मानसून सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही, विधायी एजेंडा और जनहित के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों से अपील की कि वे सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि संसद में रचनात्मक बहस, सार्थक चर्चा और सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से ही मानसून सत्र को सफल और गरिमापूर्ण बनाया जा सकता है।

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इन विधेयकों पर होगी चर्चा
इस बैठक में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए समय भी तय किया गया। इनके अनुसार:
- विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA)- 4 घंटे
- आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 – 4 घंटे
- सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 – 4 घंटे
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 – 4 घंटे
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 – 4 घंटे
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास संशोधन विधेयक, 2026 – 5 घंटे
सरकार कई अहम विधेयक लाने की तैयारी में
सरकार मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पेश करने और पारित कराने की तैयारी में है। इनमें विदेशी चंदा कानून (एफसीआरए), आयकर कानून, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने, जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था, राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून और एमएसएमई क्षेत्र में सुधार से संबंधित विधेयक प्रमुख हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की सभी दलों से अपील
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और सुचारु रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर व्यापक और सार्थक चर्चा होनी चाहिए, ताकि लोगों की समस्याओं का समाधान निकल सके। लोकसभा अध्यक्ष ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सरकार और विपक्ष के प्रतिनिधियों ने आगामी सत्र के विधायी कार्यों और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखे। इस बैठक में कई दलों ने जनहित और राष्ट्रीय महत्व के कई विषयों पर चर्चा कराने का सुझाव भी दिया, जिसे समिति ने नोट किया।
रचनात्मक बहस और संसदीय परंपराओं पर दिया जोर
इस बैठक के दौरान ओम बिरला ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। इसलिए सभी सांसदों को रचनात्मक चर्चा, सार्थक भागीदारी और संसदीय परंपराओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे ऐसा माहौल बनाएं, जिससे जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर और उपयोगी चर्चा हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न विषयों पर चर्चा का समय और कार्यक्रम संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार सरकार और विपक्ष के नेताओं से परामर्श करके तय किया जाएगा।
रिजिजू बोले- हंगामा नहीं होगा तो विधेयकों पर होगी चर्चा
इस बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार जिन महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में लाना चाहती है, उनके लिए समय निर्धारित कर दिया गया है। विपक्ष ने भी कुछ सुझाव दिए हैं, जिन्हें सरकार ने नोट किया है। उन्होंने कहा, ‘हमने विपक्ष से अपील की है कि सोमवार को संसद की कार्यवाही के दौरान हंगामा न हो। अगर सदन शांतिपूर्वक चलेगा तो कई विधेयकों पर चर्चा कराई जाएगी’। उन्होंने बताया कि कुछ विधेयक पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि पहले दिन कौन-कौन से बिल सदन में लाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष हंगामा करेगा तो सदन का कामकाज प्रभावित होगा।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए सवालों से बचने के आरोप
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष सरकार के विधेयकों पर रचनात्मक सहयोग देने के लिए तैयार है। लेकिन बदले में सरकार को भी जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि वह राम मंदिर, नीट और एथेनॉल नीति जैसे मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए तैयार है या नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार इन विषयों पर चर्चा से बचना चाहती है और सदन में ऐसा माहौल बनाना चाहती है, जिससे इन मुद्दों पर बात ही न हो सके।
टीएमसी के बागी सांसदों को लेकर विपक्ष का विरोध
बीएसी की बैठक में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बागी नेता काकोली घोष दस्तिदार भी शामिल हुईं। इससे पहले रविवार सुबह मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पूरा विपक्ष प्रतीकात्मक रूप से वॉकआउट कर गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों को अलग से बैठने की अनुमति देकर गलत फैसला लिया है। इन सांसदों ने दावा किया है कि वे नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं, जबकि इस पार्टी का संसद में पहले कोई प्रतिनिधित्व नहीं था।
‘वंदे मातरम्’ के अपमान को अपराध बनाने वाला विधेयक
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को केंद्र सरकार राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने के लिए एक विधेयक पेश करेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सदन में पेश करेंगे। यह विधेयक राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन करेगा। मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का अपमान करना अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
‘वंदे मातरम्’ को मिलेगा राष्ट्रगान जैसा कानूनी संरक्षण
प्रस्तावित संशोधन के तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालता है या किसी भी रूप में उसका अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
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150वीं वर्षगांठ के बीच सरकार का कदम
सरकार यह विधेयक ऐसे समय ला रही है, जब देशभर में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान कानूनी दर्जा और सुरक्षा देने की दिशा में यह कदम उठा रही है। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय सभी राज्यों को पत्र लिखकर निर्देश दे चुका है कि जहां भी सरकारी कार्यक्रमों में ‘जन गण मन’ गाया जाए, वहां ‘वंदे मातरम्’ का गायन या वादन भी अनिवार्य रूप से किया जाए।
13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष कई जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों के रुख पर इस सत्र की कार्यवाही काफी हद तक निर्भर करेगी।

