
Workplace Privacy: कॉरपोरेट वर्ल्ड में आज के समय में सिर्फ मेहनत करना ही काफी नहीं है. इसके साथ ही खुद को वर्कप्लेस में प्रेजेंट करने का सही तरीका और प्राइवेसी बनाए रखना भी करियर ग्रोथ के लिए बहुत इम्पॉर्टेंट है. लखनऊ के रहने वाले विकास ने हाल ही में कॉरपोरेट कल्चर को लेकर एक ब्लॉग लिखा, जिसमें उन्होंने वर्कप्लेस पर हद से ज्यादा बातें शेयर करने को गंभीर नतीजों का कारण बताया. हम रोजाना ऑफिस में 8 से 9 घंटे बिताते हैं, ऐसे में कलीग्स से दोस्ती होना बिल्कुल स्वाभाविक है. मगर प्रोफेशनल लाइफ में पर्सनल लाइफ को लेकर खुलकर बात नहीं करनी चाहिए.
कलीग्स से जरूरत से ज्यादा बातें शेयर करने से बचें
विकास के मुताबिक, ऑफिस में कलीग्स के साथ दोस्ती होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अपनी पर्सनल लाइफ की हर बात उनके साथ शेयर की जाए. जरूरत से ज्यादा पर्सनल बातें शेयर करने से आगे चलकर आपके लिए परेशानी खड़ी हो सकती है. इसलिए कलीग्स के साथ बातचीत करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि कौन सी बात शेयर करनी है और कौन सी अपने तक रखनी है.
फाइनेंशियल सिचुएशन और फैमिली प्रॉब्लम न बताएं
विकास मानते हैं कि ऑफिस में अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन, लोन, फैमिली झगड़े या सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम के बारे में बताने से आपकी प्रोफेशनल इमेज को नुकसान पहुंच सकता है. साथ ही, लोग पीठ पीछे मजाक भी उड़ा सकते हैं. इसलिए ऐसी पर्सनल परेशानियों को ऑफिस में हर किसी के साथ शेयर करने से बचना चाहिए.
करियर प्लान और भविष्य के गोल्स रखें सीक्रेट
प्रोफेशनल लाइफ में आपके करियर प्लान और भविष्य के गोल्स हमेशा सीक्रेट रहने चाहिए, क्योंकि आपके शॉर्टकट या प्लान आपके खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं. विकास बताते हैं कि कई लोग अपने काम को जल्दी खत्म करने के स्मार्ट तरीके या शॉर्टकट कलीग्स को बता देते हैं, जिससे कोई दूसरा व्यक्ति बॉस के सामने चुगली करके आपकी छवि खराब कर सकता है.
नौकरी बदलने या इंटरव्यू की जानकारी न दें
विकास के अनुसार, ऑफिस में अपने भविष्य के करियर प्लान को हर किसी के साथ शेयर करना सही नहीं है. आप कब नौकरी बदलने वाले हैं, कहां इंटरव्यू दे रहे हैं या आगे क्या करने की तैयारी कर रहे हैं, ऐसी जानकारी को कलीग्स के साथ शेयर करने से बचना चाहिए. जब तक कोई फैसला पूरी तरह तय न हो जाए, तब तक ऐसी पर्सनल जानकारी को अपने तक रखना बेहतर है.
सैलरी और इंसेंटिव का अमाउंट न बताएं
इसके अलावा, अपनी सैलरी या इंसेंटिव का सटीक अमाउंट कभी भी अपने कलीग्स को नहीं बताना चाहिए. हालांकि, कई कर्मचारी सैलरी ट्रांसपेरेंसी की बात करते हैं, लेकिन विकास के अनुसार, कलीग्स के बीच सैलरी और इंसेंटिव की जानकारी शेयर करने से अनावश्यक तुलना और तनाव की स्थिति बन सकती है. इसलिए अपनी कमाई से जुड़ी सटीक जानकारी को पर्सनल रखना बेहतर है.
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