ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मेहर न्यूज को दिए इंटरव्यू में मिडिल ईस्ट में जंग पर खुलकर अपना पक्ष रखा. इसके अलावा उन्होंने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ हुई बातचीत के बारे में भी बताया. अराघची ने कहा कि 12 दिन की जंग से पहले अमेरिका ने बातचीत में जीरो यूरेनियम एनरिचमेंट की मांग रखी थी.
उन्होंने कहा कि इस गैर-कानूनी और बेतुकी मांग का हमने विरोध किया और अपनी बात पर अड़े रहे. अराघची ने बताया कि जब अमेरिकियों ने देखा कि बातचीत से वे अपनी मनचाही मांग पूरी नहीं कर सकते, तो उन्होंने जंग शुरू कर दी. उन्होंने कहा कि बातचीत की मेज पर ईरान के अडिग रहने की वजह से अमेरिका को मुश्किल रास्ता चुनना पड़ा और 12 दिन की जंग में उनकी हार हुई.
अराघची ने अमेरिकी दूत विटकॉफ के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि मैंने उनसे पूछा, “क्या आप कभी ऐसी मीटिंग में शामिल हुए हैं जहां आपको हर पल यह लगे कि पूरी मीटिंग पर बम गिर सकता है? क्या कभी फोन पर बात करते हुए आपको ऐसा लगा है कि आप किसी भी पल फट सकते हैं? क्या आपने कभी फोन पर अपने परिवार का हाल-चाल पूछा है और सोचा है कि शायद यह आखिरी बार हो? हमने ये सब अनुभव किया है और हम डटे रहे.”
Iran’s FM Araghchi hasn’t yet personally met Supreme Leader Mojtaba Khamenei
‘I don’t think, aside from a very few people, anyone has seen him’ https://t.co/ZnaQwp9YSF pic.twitter.com/DqeGxR9P7M
— RT Intl (@RT_on_X) July 19, 2026
विटकॉफ संग हुई बातचीत का सुनाया किस्सा
उन्होंने आगे बताया कि मैंने विटकॉफ से कहा कि आपको हमसे अलग तरह से बात करनी होगी. आप हमें न तो धमका सकते हैं और न ही रिश्वत दे सकते हैं. अरागची ने कहा कि अमेरिका ने कुछ रियायतों के बदले पावर प्लांट और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन मैंने कहा कि न कोई रिश्वत चलेगी, न कोई धमकी. धमकी उसे दी जा सकती है जो डरा हुआ हो. जब हम इस रास्ते पर निकले हैं, तो हमें पता है कि किसी भी पल हमारे साथ कुछ भी हो सकता है, इसलिए आप मुझे डरा नहीं सकते.
अराघची ने 3 जनवरी को हुए उस अमेरिकी ऑपरेशन का भी जिक्र किया, जिसमें वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर मुकदमे के लिए न्यूयॉर्क ले जाया गया. उन्होंने कहा कि यह वेनेजुएला नहीं है जहां आप एक व्यक्ति को पकड़ लें और बाकी सब डरकर पीछे हट जाएं.
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