
- ट्रंप को भारी मुनाफा, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद.
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 की फाइनेंशियल रिपोर्ट में 1.4 अरब डॉलर से अधिक की कमाई क्रिप्टो-एसेट्स से होने का खुलासा किया है. इस रिपोर्ट में ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ के जरिए पाकिस्तान के साथ एक डील की भी बात शामिल है. ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ एक डिजिटल करेंसी प्लेटफॉर्म है, जिसे ट्रंप ने सितंबर 2024 अपने बेटे के साथ मिलकर लॉन्च किया था.
30 जून को US ऑफिस ऑफ गवर्नमेंट एथिक्स (OGE) की तरफ से 927 पेज की ट्रंप की सालाना फाइनेंशियल रिपोर्ट पेश की गई, तो क्रिप्टोकरेंसी से हुई उनकी बंपर कमाई ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. क्रिप्टो से हुई इस कमाई ने ट्रंप के रियल एस्टेट बिजनेस को भी पछाड़ दिया.
पाकिस्तान के साथ क्या है डील?
रिपोर्ट में ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ के पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय और पाकिस्तान वर्चुअल एसेट्स रेगुलेटरी अथॉरिटी (PVARA) के साथ हुई एक डील का भी खुलासा किया गया. ट्रंप की कंपनी के साथ USD1 स्टेबलकॉइन डील का मकसद पाकिस्तान के पेमेंट इंफ्रास्टक्चर को अमेरिकी डॉलर से जोड़कर विदेशी रेमिटेंट्स को आसान बनाना और डॉलर संकट से निपटना है.
USD1 कॉइन ट्रंप और उनके बेटे की कंपनी का बनाया गया अपना खुद का प्रोडक्ट है. इस डिजिटल करेंसी की सबसे बड़ी खासियत है कि इसकी कीमत हमेशा 1 अमेरिकी डॉलर के बराबर रहती है, जबकि बिटकॉइन जैसी आम क्रिप्टो की कीमतें रोज ऊपर-नीचे होती रहती हैं, जबकि स्टेबलकॉइन की कीमत जस की तस रहती है. यह एक तरह से डिजिटल डॉलर की तरह काम करता है.
डील में पाकिस्तान की क्या है भूमिका?
पाकिस्तान इस डील के जरिए अपने देश के बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम में स्टेबलकॉइन को शामिल करने की कोशिश में जुटी है. इसे विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानी बिना किसी झंझट और कम फीस में डिजिटल डॉलर में पैसा पाकिस्तान में अपने परिवारों को भेज सकते हैं. पाकिस्तान के पास अकसर डॉलर की कमी हो जाती है. ऐसे में इस डिजिटल डॉलर के इस्तेमाल से देश में डॉलर का सर्कुलेशन भी बढ़ेगा.
ट्रंप को होगा बंपर मुनाफा
अब जाहिर सी बात है कि जब पाकिस्तान के पेमेंट सिस्टम में बड़े पैमाने पर ट्रंप के स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल होगा, तो हर ट्रांजैक्शन पर कंपनी की फीस और कमीशन के तौर पर मोटी कमाई होगी और ट्रंप को अरबों रुपये का मुनाफा होगा. इधर, पाकिस्तान को भी उम्मीद है कि वह ट्रंप की कंपनी के साथ डील करेगा, तो अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय र्मोचे पर IMF जैसे बड़े वित्तीय संस्थानों से उसे कर्ज दिलाने में मदद करेगा.
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