लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

मदर इंडिया के सेट पर आग से बचाना महज एक बहाना था, नरगिस की इस ‘एक आदत’ पर दिल हार बैठे थे सुनील दत्त

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---


इश्क, प्यार और मोहब्बत में सब कुछ जायज हो जाता है, खासकर तब जब वह इश्क ऐसे इंसान से हो जिसे आपके परिवार की चिंता आपसे भी ज्यादा हो. हिंदी सिनेमा के दिग्गज दिवंगत अभिनेता सुनील दत्त, जिनकी संवाद डिलीवरी में जादू था और निगाहों में गहराई. जब वे स्क्रीन पर आते, पूरा सिनेमाघर सन्नाटे में डूब जाता. दर्शक सांस रोककर देखते और आंखें स्क्रीन से हट ही नहीं पातीं. दिलीप कुमार जैसे दिग्गजों के सामने सुनील दत्त ने अपनी अलग पहचान बनाई.

सुनील दत्त के फैंस और उनकी फिल्मों से प्यार करने वाले लोग आज भी मानते हैं कि 1957 की फिल्म ‘मदर इंडिया’ की शूटिंग के दौरान आग की लपटों से नरगिस को बचाने के बाद सुनील दत्त को उनसे प्यार हो गया लेकिन असलियत कुछ और ही थी.

‘मदर इंडिया’ नहीं, बल्कि ‘फैमिली प्रायोरिटी’ ने नरगिस के लिए सुनील दत्त के दिल में प्यार की घंटी बजाई थी. नरगिस ने सुनील दत्त की बहन का बिना किसी स्वार्थ के इतना ख्याल रखा, परिवार की चिंता की और मुश्किल वक्त में साथ खड़ी हुई कि सुनील दत्त दंग रह गए.

एक इंटरव्यू में सुनील दत्त ने खुद बताया था कि अगर आग बुझाने से प्यार हो जाता तो मैंने कई हीरोइनों को बचाया है. मीडिया ने इसे ज्यादा तूल दे दिया. असल बात ये है कि नरगिस बहुत अच्छी थीं. उन्होंने मेरी बहन का भरपूर ख्याल रखा. आज के समय में किसी के पास इतना समय कहां. उनके परिवार की चिंता और परवाह देखकर मैं दंग रह गया. मैंने तय कर लिया कि शादी के लिए नरगिस को कहूंगा. अगर वो मना कर देंगी तो मैं गांव लौट जाऊंगा और खेती करूंगा. नरगिस ने हां कर दी. सुनील दत्त की मां भी इस रिश्ते से बेहद खुश थीं. इस तरह सेट का प्रोफेशनल रिश्ता धीरे-धीरे रूहानी बंधन में बदल गया. यही है सुनील दत्त और नरगिस की वो अनकही प्रेम कहानी.

‘मदर इंडिया’ में उनका गुस्सैल रवैया आज भी दर्शकों को प्रभावित करता है. उन्होंने अभिनय के अलावा राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई. वे पंडित जवाहरलाल नेहरू से काफी प्रभावित थे. वे सांसद बने और केंद्रीय मंत्री के तौर पर भी देश की सेवा की. उन्हें देश की सेवा करना, लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाना काफी अच्छा लगता था. लोग उनसे जुड़ते चले गए और सुनील दत्त ने राजनीति में भी कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

सुनील दत्त भी उन कलाकारों में से एक थे, जिन्होंने फिल्मों में आने के बाद नाम बदल लिया. फिल्मों में आने से पहले सुनील दत्त को बलराज दत्त के नाम से जाना जाता था, लेकिन सुनील दत्त बनने की कहानी भी दिलचस्प है. 1950 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री के समय बलराज साहनी जैसे बड़े नामों से अलग पहचान बनाने के लिए बलराज दत्त (सुनील दत्त) ने नाम बदला. रेलवे प्लेटफॉर्म से सुनील दत्त ने फिल्मी करियर शुरू किया और इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मों में अपने अभिनय से 50 और 60 के दशक में अपनी छाप छोड़ी.

सुनील दत्त ने अपने जीवन की सबसे बड़ी खुशी का जिक्र करते हुए कहा था कि मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी तब मिली, जब बंटवारे के बाद मुझे मेरी मां मिली. बंटवारे के दौरान लाखों लोगों का घर उजड़ गया. सुनील दत्त भी परिवार को ढूंढते रहे. अंबाला में एक टांगे वाले रिश्तेदार ने उन्हें अपनी मां, भाई और बहन से मिलाया. उस पल को याद करते हुए वे कहते थे, “ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया मिल गई हो. मेरी सारी उम्मीदें टूट चुकी थीं, लेकिन मां सामने थी. फिर नई शुरुआत हुई.

सुनील दत्त यह मानते हैं कि उन्हें जो कुछ भी मिला, वह दर्शकों के प्यार और मोहब्बत से मिला, क्योंकि वे तो कभी फिल्म इंड्रस्टी में आना नहीं चाहते थे.

सुनील ने बताया था कि वह तो मशहूर फिल्मस्टार का इंटरव्यू लेते थे, हालांकि इस दौरान उनकी आवाज लोगों को काफी पसंद आई. फैंस उनके लिए भी पत्र लिखते थे.

सुनील ने अपनी फिल्म ‘मिलन’ के बारे में बताया कि कैसे उन्होंने गोदावरी नदी में कश्ती चलाने की सच्ची तैयारी की.

‘मदर इंडिया’ को क्लासिक फिल्म बताते हुए उन्होंने कहा था कि यह बहुत कम बनती है. इस फिल्म को ऑस्कर के लिए नामांकन मिला था, लेकिन एक वोट से चूक गई.

1962 के युद्ध के दौरान उन्होंने जवानों के मनोरंजन के लिए लद्दाख तक का सफर किया. इससे पूर्व पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू काफी प्रभावित हुए थे.

सुनील दत्त की कहानी सिर्फ फिल्मी सफलता की नहीं, बल्कि बंटवारे के दर्द, सच्चे प्यार, परिवार की प्राथमिकता और देशभक्ति की भी है. एक ऐसा सफर जो आज भी प्रेरणा देता है.

सुनील दत्त ने मदर इंडिया, वक्त, पड़ोसन, खानदार, सुजाता, रेशमा और शेरा, हमराज, और मुन्नाभाई एमबीबीएस में काम किया. इस फिल्म में आखिरी बार सुनील दत्त और उनके बेटे संजय दत्त ने साथ में काम किया था. यह उनकी आखिरी फिल्म थी और ब्लॉकबस्टर रही. 6 जून 1929 को जन्मे सुनील दत्त का निधन 25 मई 2005 को हुआ था.



Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Meenakshi Recreates Nagin Song: ‘नागिन’ वाले सुनहरे दौर में लौटीं मीनाक्षी शेषाद्रि, रिक्रिएट किया ‘नाचे नागिन गली गली’ का आइकॉनिक गाना

गोविंदा से प्रीति जिंटा तक, सालों बाद इन सितारों की होगी बड़े पर्दे पर वापसी, इन फिल्मों से मचाएंगे गदर

कैसे शुरू हुई यामी गौतम और आदित्य धर की लव स्टोरी? एक्ट्रेस ने खुद सुनाई कहानी, कहा- ‘टीम को भी पता नहीं चला’

Randeep Hooda Post: बेटी न्योमिका की पहली ‘चावल रस्म’ पर रणदीप हुड्डा ने परिवार संग बिताए खास पल

पहली बार मसूरी पहुंचीं संगीता बिजलानी, बोलीं- ऐसा लगा जैसे बादलों के ऊपर उड़ रही हूं

प्रियंका चोपड़ा के बर्थडे पर पति निक जोनास का दिखा रोमांटिक अंदाज, शेयर किया खास वीडियो

Leave a Comment