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नई दिल्ली3 घंटे पहले
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इस साइबर हमले के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को फिरौती के लिए कॉल-मैसेज मिला है।
टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का डेटा डार्क वेब पर लीक हो गया है। इस साइबर अटैक में हैकर्स ने डार्क वेब पर कंपनी की 2 लाख से ज्यादा सिक्रेंट फाइलें लीक कर दी हैं।

इनमें टाटा के दो सबसे बड़े क्लाइंट्स- एपल और टेस्ला के कंपोनेंट डिजाइन, स्पेसिफिकेशन पेपर्स और सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स शामिल हैं।
हालांकि, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने साफ किया है कि इस घटना से उनके बिजनेस ऑपरेशन्स पर कोई असर नहीं पड़ा है और सभी काम सामान्य रूप से चल रहे हैं।

एपल की साइबर सिक्योरिटी टीम भी कर रही जांच
मनीकंट्रोल के मुताबिक, एपल की ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी टीम भी इस डेटा ब्रीच की जांच और इसका पूरा एनालिसिस कर रही है, ताकि इसके पीछे की मुख्य वजह का पता लगाया जा सके।
वहीं एपल ने यह भी कहा है कि फिलहाल इस लीक से बिजनेस-ऑपरेशन्स पर कोई खतरा नहीं है।
वर्ल्ड लीक्स गैंग ने ली जिम्मेदारी, 630 GB डेटा चोरी
साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स के मुताबिक, ‘वर्ल्ड लीक्स’ नाम के रैनसमवेयर ग्रुप ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सिस्टम से चुराया गया डेटा डार्क वेब पर पोस्ट किया है।
इस ग्रुप ने पहले नाइकी के सिस्टम पर साइबर अटैक का दावा किया था। डार्क नेट पर पब्लिश की गई वेबसाइट के अनुसार, इस लीक में कुल 630 गीगाबाइट (GB) का डेटा शामिल है, जिसमें 2 लाख से ज्यादा फाइलें और फोल्डर्स हैं।
एपल और टेस्ला के ‘ट्रेड सीक्रेट्स’ लीक हुए
लीक हुए डेटाबेस में एपल के कई फोल्डर्स मिले हैं, जिनमें से कुछ का नाम “com.apple.factorydata” है और कुछ में मटेरियल स्पेसिफिकेशन की जानकारी है। इसके अलावा, एक 52 पेज का डॉक्यूमेंट भी मिला है, जिसमें आईफोन के सर्किट बोर्ड कंपोनेंट्स के क्वालिटी इंस्पेक्शन स्टैंडर्ड्स की डिटेल है।
वहीं टेस्ला के पुर्जों से जुड़ा एक फोल्डर “NV36 Chargeport Controller – North America” नाम से मिला है, जो टेस्ला की अपग्रेडेड मॉडल Y SUV का माना जा रहा है। टेस्ला का साल 2023 का एक और डॉक्यूमेंट मिला है जिस पर ‘ट्रेड सीक्रेट’ लिखा है, यह उसकी रीवैम्प्ड मॉडल 3 सिडान (प्रोजेक्ट हाइलैंड) का असेंबली डॉक्यूमेंट है।
कर्मचारियों के पासपोर्ट और ईमेल भी डार्क वेब पर
भारतीय साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर राजशेखर राजहरिया ने इन फाइलों का रिव्यू करने के बाद बताया कि इस डेटा डार्क वेब पर सिर्फ डिजाइन ही नहीं, बल्कि कई सालों के ईमेल, इवेंट लॉग्स और विदेशी नागरिकों सहित टाटा के कर्मचारियों के पासपोर्ट की कॉपियां भी मौजूद हैं। दूसरे रिसर्चर राकेश कृष्णन के अनुसार, यह डेटा डार्क वेब पर कम से कम 10 जून से ही अवेलेबल है।
टाटा को फिरौती के लिए कॉल-मैसेज मिला
मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि इस साइबर हमले के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को फिरौती के लिए भी कॉल या मैसेज मिला है। हालांकि, इस फिरौती की मांग पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। भारत सरकार की साइबर एजेंसी CERT-In ने भी अभी इस पर कोई कमेंट नहीं किया है।
टाटा के होसुर प्लांट की 33 फाइलें लीक हुईं
डेटा लीक में तमिलनाडु के होसुर में स्थित टाटा के मुख्य आईफोन असेंबली प्लांट से जुड़े सर्च टर्म की 33 फाइलें और फोल्डर्स मिले हैं। टाटा ने पिछले हफ्ते ही अपने आईफोन असेंबली ऑपरेशन्स से जुड़े कुछ कर्मचारियों को इस डेटा ब्रीच की जानकारी दे दी थी।
आपको बता दें कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में एपल के कुल आईफोन प्रोडक्शन का करीब एक-तिहाई (33%) हिस्सा बनाती है, जबकि बाकी का हिस्सा फॉक्सकॉन तैयार करती है।
एपल की सप्लाई चेन के लिए नया सिरदर्द
भारत में एपल की सप्लाई चेन के लिए यह घटना एक और नया झटका मानी जा रही है। इससे पहले होसुर में आईफोन पार्ट्स बनाने वाले एक प्लांट के पास की कृषि भूमि के प्रदूषित होने के आरोपों को लेकर भी टाटा की जांच चल रही है।
भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का पावरहाउस बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत, टाटा चीन से बाहर एपल का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पार्टनर बनकर उभर रहा है। इससे पहले पिछले साल टाटा ग्रुप की ब्रिटिश कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) पर भी साइबर अटैक हुआ था, जिससे 6 हफ्ते तक प्रोडक्शन ठप रहा था।
क्या होता है डार्क वेब और रैनसमवेयर अटैक?
डार्क वेब: इंटरनेट का वह छिपा हुआ हिस्सा जो सामान्य गूगल या बिंग जैसे सर्च इंजनों पर दिखाई नहीं देता। इसे एक्सेस करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर (जैसे टॉर ब्राउजर) की जरूरत होती है। अक्सर इसका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और डेटा बेचने के लिए किया जाता है।
रैनसमवेयर: यह एक तरह का खतरनाक डिजिटल वायरस (मालवेयर) होता है, जो किसी कंपनी या व्यक्ति के कंप्यूटर सिस्टम को लॉक या हैक कर लेता है। इसके बाद हैकर्स डेटा को डिलीट या लीक करने की धमकी देकर मोटी फिरौती मांगते हैं।
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तमिलनाडु पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने आरोप लगाया है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आईफोन कंपोनेंट्स फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी (वेस्टवाटर) ने पास के खेतों के भूजल यानी ग्राउंडवाटर को दूषित कर दिया है।
रेगुलेटर ने कंपनी को चेतावनी दी है कि अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो फैक्ट्री की बिजली काट दी जाएगी और इसे जबरन बंद कर दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

