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Spying:क्या इस्राइल कर रहा अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी? रिपोर्ट में बड़ा दावा, पेंटागन ने जताई चिंता – Pentagon Raise Threat Level Of Israel Spying On Us To Highest Trump Netanyahu Burner Phone Cautious Hotel Stay

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान संघर्ष को लेकर मतभेद बढ़ने के संकेत साफ दिख रहे हैं। इस बीच पेंटागन ने इस्राइली खुफिया गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। पेंटागन ने चेतावनी दी है कि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी इस्राइल की जासूसी गतिविधियों के निशाने पर हो सकते हैं।

एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, दो वर्तमान अमेरिकी अधिकारियों और एक पूर्व अधिकारी ने खुलासा किया है कि पेंटागन की रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) ने हाल ही में इस्राइल के प्रति-खुफिया खतरे (काउंटर-इंटेलिजेंस थ्रेट) की श्रेणी को बढ़ाकर ‘गंभीर’ (critical) कर दिया है, जो इसके आंतरिक मूल्यांकन का उच्चतम स्तर है।

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जासूसी की आशंका के चलते बरतीं क्या सावधानियां?

एक वर्तमान अधिकारी ने अमेरिकी प्रसारक से कहा, “इस्राइल की यात्रा के दौरान अमेरिका पहले से ही अतिरिक्त सावधानी बरतता है।” उन्होंने बताया कि इस्राइली खुफिया एजेंसियों को लंबे समय से सूचना एकत्र करने में विशेष रूप से आक्रामक माना जाता रहा है।

खासकर उच्च-स्तरीय यात्राओं के दौरान ऐसी सावधानियों में कथित तौर पर बर्नर फोन, अस्थायी कंप्यूटर और सख्त संचार प्रोटोकॉल का इस्तेमाल शामिल है। पूर्व राजनयिकों, खुफिया अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी अक्सर इस्राइल में संवेदनशील मामलों पर होटल के कमरों और अन्य संभावित संवेदनशील जगहों पर गोपनीय चर्चा करने से बचते हैं।

इस कदम ने अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान के कुछ वर्गों के बीच बढ़ती चिंता को दर्शाया है कि इस्राइल पश्चिम एशिया में संघर्षों पर ट्रंप प्रशासन की आंतरिक चर्चाओं के बारे में आक्रामक रूप से जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है।

आंतरिक आकलन रिपोर्ट में जताई गई चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, यह आकलन ऐसे समय में तैयार किया गया जब ईरान के खिलाफ युद्ध की दिशा को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। मामले से परिचित अधिकारियों ने एनबीसी न्यूज को बताया कि डीआईए ने सात पन्नों का एक आकलन दस्तावेज प्रसारित किया, जिसमें इस्राइल की खुफिया जानकारी एकत्र करने की क्षमताओं के बारे में चिंताएं जताई गई थी।

दस्तावेज में कई ऐसी घटनाओं का भी जिक्र किया गया है, जिन्होंने चिंता को बढ़ा दिया है। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि वे किसी भी एक घटना से अवगत नहीं थे, जिसने सीधे इस फैसले को जन्म दिया हो। वर्तमान और पूर्व अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा सावधानियां अपनाने की संभावना है। हालांकि, दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करना अप्रभावित रहेगा।

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के रक्षा और सुरक्षा विभाग की उपाध्यक्ष एमिली हार्डिंग ने इस्राइल की खुफिया प्रणाली को अति-आक्रामक बताया। उन्होंने कहा, “वे इस बात में बहुत ज्यादा रुचि रखते हैं कि हम क्या कर रहे हैं।”

इस्राइल ने किया आरोपों का खंडन

इस्राइल ने आरोपों का कड़ा खंडन किया है। वॉशिंगटन में इस्राइली दूतावास के एक प्रवक्ता ने अमेरिकी अधिकारियों पर जासूसी के दावों को पूरी तरह से झूठा बताया। प्रवक्ता ने कहा, “इस्राइल अमेरिकी संस्थाओं पर, विशेष रूप से अमेरिकी सरकारी अधिकारियों पर खुफिया जानकारी एकत्र नहीं करता है।” उन्होंने आगे कहा कि इस्राइली खुफिया अभियान सहयोगियों के बजाय विरोधियों पर केंद्रित होते हैं।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने भी इन दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने रिपोर्ट को झूठा बताया और कहा कि यह ऐसे लोगों के हवाले से प्रकाशित की गई है,  जिन्हें आंतरिक घटनाक्रम की जानकारी नहीं है। हालांकि, सहयोगी देशों के बीच खुफिया जानकारी जुटाना असामान्य नहीं माना जाता, लेकिन वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर ऐसे आरोप सही हैं, तो यह मित्र देशों के बीच सामान्य रूप से स्वीकार्य जासूसी गतिविधियों की सीमा से आगे जाता है।

ईरान पर ट्रंप-नेतन्याहू में मतभेद

यह चिंताएं अमेरिका-इस्राइल संबंधों के एक नाजुक दौर में उभर रही हैं। अप्रैल में युद्धविराम के बाद से ट्रंप ने ईरान के साथ एक व्यापक समझौते को सुरक्षित करने के उद्देश्य से राजनयिक प्रयासों को आगे बढ़ाया है। वहीं, नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया है कि क्या तेहरान किसी भी बातचीत समझौते का सम्मान करेगा। 

रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइली अधिकारी ईरान पर फिर से सैन्य दबाव बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं और लेबनान में हिज्बुल्ला से जुड़े अभियानों को लेकर वॉशिंगटन से उनके मतभेद भी सामने आए हैं। हाल ही में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर तीखी बातचीत भी हुई थी। बाद में ट्रंप ने स्वीकार किया था कि उन्होंने इस्राइली प्रधानमंत्री को “पागल” कहा था। इससे यह अटकलें और तेज हो गईं कि दोनों नेताओं के रणनीतिक लक्ष्य अब एक-दूसरे से अलग होते जा रहे हैं।

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इस सप्ताह अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस ने भी रिपोर्ट दी थी कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई एक तनावपूर्ण फोन बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर संभावित इस्राइली हवाई हमलों की धमकी को लेकर नाराजगी जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू को साफ तौर पर चेतावनी दी कि इन घटनाओं से इस्राइल की स्थिति को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, “अब हर कोई आपसे नफरत करता है। इस वजह से हर कोई इस्राइल से नफरत करता है।”

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