Petrol Diesel Price: यूएस- ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है. जिसकी वजह से पेट्रोल- डीजल और गैस के दाम बढ़ रहे हैं. जिससे आम आदमी तो परेशान हो ही रहा है लेकिन अब एक बार फिर से सरकार ने आम आदमी की टेंशन बढ़ा दी है. सरकार की तरफ से बताया गया है कि तेल कंपनियों को ईंधन के दाम बढ़ाने के बाद भी घाटा हो रहा है. जिसे देख लगता है कि आने वाले समय में और भी दाम बढ़ने वाले हैं.
पेट्रिलियम मंत्रालय का बयान
दरअसल हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय ने मीडिया ब्रीफिंग की है, जिसमें बताया गया है कि सरकारी तेल कंपनियों को डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर, पेट्रोल पर 6 रुपये प्रति लीटर और घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान हो रहा है. इन सभी को मिलाकर कंपनियों को हर दिन 600-700 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण मल खानूजा ने बताया कि, ‘डीजल पर प्रति लीटर लगभग 30 रुपये का घाटा हो रहा है. दिल्ली में जब आप 95 रुपये में डीजल खरीदते हैं, तो वास्तव में शेष 30 रुपये कंपनी वहन करती है, और पेट्रोल के मामले में ये घाटा आज भी लगभग 6 रुपये प्रति लीटर है. दैनिक घाटा अब भी 600-700 करोड़ रुपये के आसपास है.’
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट है कारण
ईरान- यूएस युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में रुकावट बनी हुई है, जिसके कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. इसका असर भारत की सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) पर भी पड़ा है, क्योंकि वो घरेलू उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं. इससे इन कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है.
इसी बीच, बता दें कि 7 जून को सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की है. मिडिल ईस्ट में संकट शुरू होने के बाद ये दूसरी बार है, जब रसोई गैस के दाम बढ़ाए गए हैं.
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