नीट-यूजी के छह अभ्यर्थियों ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान उनकी ओएमआर शीट में दर्ज किए गए उत्तर और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की ओर से उपलब्ध कराई गई ओएमआर शीट की प्रतियों में अंतर है।
याचिका का जिक्र भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के समक्ष करते हुए काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई।
वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दी क्या दलील?
वकील ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ से कहा कि मामला छह ऐसे छात्रों से जुड़ा है, जिन्होंने 600 और 650 से अधिक अंक हासिल किए हैं। उनका दावा है कि एनटीए की ओर से अपलोड की गई ओएमआर शीट में दर्ज उत्तर, परीक्षा के दौरान उनके द्वारा चिह्नित उत्तरों से अलग हैं।
मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए जताई सहमति
वकील ने अदालत को यह भी बताया कि छात्रों ने इस संबंध में एनटीए को ईमेल भेजे और उसके कार्यालय भी गए, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। नीट-यूजी 2026 की परीक्षा मूल रूप से 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के बाद इसे रद्द कर दिया गया था। इसके बाद एनटीए ने 21 जून को परीक्षा दोबारा आयोजित कराई।
नीट-यूजी ओएमआर शीट विवाद क्या है?
नीट-यूजी 2026 परीक्षा के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि उनकी उत्तर पुस्तिका (ओएमआर शीट) में उन्होंने जो उत्तर भरे थे, वे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की ओर से उपलब्ध कराई गई स्कैन कॉपी से मेल नहीं खाते। इन छात्रों का कहना है कि कई प्रश्नों में उनके द्वारा भरे गए उत्तर बदल गए हैं या गलत तरीके से दर्ज दिखाई दे रहे हैं, जिससे उनके अंक और रैंक प्रभावित हुई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि ओएमआर शीट में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच किए बिना प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो उन्हें अपूरणीय नुकसान हो सकता है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने अब तक परीक्षा प्रक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बताया है। एजेंसी का कहना है कि उम्मीदवारों को उनकी रिकॉर्डेड ओएमआर शीट उपलब्ध कराई जाती है और आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था भी होती है।

