भिंड जिले में एटीएम मशीन से छेड़छाड़ कर ग्राहकों के पैसे हड़पने वाले एक अंतरराज्यीय गैंग का मेहगांव थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गैंग के तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 94 एटीएम कार्ड, एल्युमीनियम प्लेट, दो कैंची, तीन काले टेप, एक नीला टेप, फेवीक्विक, मोबाइल फोन और एक टाटा हैरियर कार बरामद की गई है। पुलिस के मुताबिक जब्त किए गए मशरूका की कुल कीमत करीब 36 लाख रुपये है।
दरअसल इस पूरे गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी एसबीआई के एटीएम को निशाना बनाते थे और एटीएम के कैश निकलने वाले हिस्से में एल्युमीनियम प्लेट को काले टेप की मदद से चिपका देते थे। इसके बाद जब कोई ग्राहक एटीएम में कार्ड डालकर पैसे निकालने की प्रक्रिया पूरी करता था, तो उसके खाते से रकम कट जाती थी, लेकिन कैश ग्राहक के हाथ नहीं लगता था। ग्राहक को लगता था कि एटीएम मशीन में तकनीकी खराबी आ गई है और इसी वजह से पैसा बाहर नहीं निकला। ग्राहक के वहां से चले जाने के बाद आरोपी वापस एटीएम के पास पहुंचते और मशीन में फंसी रकम निकालकर फरार हो जाते थे।
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ऐसे खुला मामला
इस गैंग का शिकार बने एक ग्राहक की शिकायत के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। 29 सितंबर को एक ग्राहक मेहगांव के गोरमी तिराहे पर बने एसबीआई के एटीएम से दस हजार रुपये निकालने पहुंचा था। ग्राहक ने एटीएम में अपना कार्ड लगाया, कोड डाला और ट्रांजेक्शन किया। लेकिन कैश बाहर नहीं निकला। इसके साथ ही एटीएम से ट्रांजेक्शन सफल होने की रसीद भी निकल गई। ग्राहक को लगा कि शायद मशीन में तकनीकी खराबी के कारण पैसे नहीं निकले हैं। इसके बाद ग्राहक ने बैंक में शिकायत की, लेकिन वहां से उसे पता चला कि उसके खाते से दस हजार रुपये की रकम निकल चुकी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राहक ने 1 अक्टूबर को मेहगांव थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने एटीएम के आसपास लगे CCTV कैमरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया। इसके साथ ही पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय कर दिया। जांच के दौरान पुलिस को गोरमी तिराहे स्थित एसबीआई एटीएम के आसपास कुछ संदिग्ध युवकों की गतिविधियां नजर आईं। पुलिस ने संदिग्धों पर नजर रखी और 2 अक्टूबर को घेराबंदी कर तीन युवकों को पकड़ लिया।

गूगल मैप से तलाशते थे एटीएम
पुलिस हिरासत में लेकर जब तीनों से पूछताछ की गई तो एटीएम में हेराफेरी कर ग्राहकों की रकम हड़पने की वारदात का खुलासा हुआ। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस के सामने इस तरीके से वारदात करने की बात स्वीकार की। पुलिस के मुताबिक आरोपी गूगल मैप के जरिए एटीएम की लोकेशन तलाशते थे। उनकी खास नजर ऐसे एटीएम पर रहती थी जो हाईवे या मुख्य सड़कों के किनारे बने हों। इसकी वजह यह थी कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों के लिए कार से तुरंत दूसरे शहर की ओर भागना आसान हो जाता था।
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दूसरे राज्यों में भी कर चुके वारदात
आरोपी एक जगह वारदात करने के बाद ज्यादा देर वहां नहीं रुकते थे। वारदात के बाद कार से दूसरे शहर की ओर निकल जाते थे, जिससे पुलिस को उनकी लोकेशन ट्रेस करने में परेशानी हो। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी 24 सितंबर को टाटा हैरियर कार से नोएडा से निकले थे। इसके बाद आगरा, मुरैना और ग्वालियर के रास्ते मेहगांव पहुंचे थे। पुलिस के मुताबिक आरोपी मध्य प्रदेश में वारदात करने के बाद आगे दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की वारदात करने की तैयारी में थे। पूछताछ के दौरान दक्षिण भारत के अलग-अलग इलाकों में भी एटीएम से इसी तरह ठगी करने की योजना का खुलासा हुआ है। इससे पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि आरोपी देश के कई राज्यों में इसी तरीके से वारदात कर चुके हैं। पुलिस जांच में आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है।
आठ साल से चल रही धोखेबाजी
पुलिस के मुताबिक आरोपी वर्ष 2018 से इसी तरह एटीएम मशीनों में हेराफेरी कर रहे थे। वर्ष 2019 में देहरादून और वर्ष 2020 में रुद्रप्रयाग में इसी तरह की वारदातों के मामलों में पकड़े जाने के बाद आरोपी जेल भी जा चुके हैं। आरोपियों के कब्जे से बरामद 94 एटीएम कार्ड ने पुलिस की जांच को और गंभीर बना दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कार्डों का इस्तेमाल किन-किन जगहों पर किया गया और इनसे कितनी रकम निकाली गई। आरोपियों पर अलग-अलग स्थानों पर एटीएम कार्ड के जरिए अलग-अलग मशीनों से रुपये निकालकर ठगी करने का भी आरोप है।
इन्हें किया गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 30 वर्षीय सत्यार्थ सिंह निवासी अयोध्या, 26 वर्षीय सत्यम सिंह परिहार निवासी कानपुर, उत्तर प्रदेश और अभिजीत सिंह निवासी हरदोई, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। मेहगांव थाना प्रभारी रविन्द्र शर्मा के मुताबिक इस तरह की वारदात में सबसे बड़ी समस्या यह थी कि एटीएम से कैश नहीं निकलने पर कई ग्राहक इसे मशीन की तकनीकी खराबी मानकर वहां से चले जाते थे और पुलिस या बैंक में शिकायत नहीं करते थे। इसी बात का फायदा आरोपी उठाते थे। इस पूरे मामले में पुलिस अब आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि गिरोह ने अब तक कितने ATM को निशाना बनाया, कितने ग्राहकों से ठगी की, कितनी रकम हड़पी और इस नेटवर्क में इनके साथ और कितने लोग जुड़े हुए हैं।

