लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

तुरंत खरीद लें घर, महंगा होने वाला है लोन, 0.50% रेपो रेट बढ़ाने की तैयारी में RBI

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

देश में महंगाई लगातार बढ़ती ही जा रही है, खाने- पीने के सामान से लेकर तेल की कीमतों में भी तेजी से इजाफा हो रहा है. इसी बीच अब RBI भी महंगाई बढ़ाने की फिराक में है. खबरों की मानें तो जल्दी ही भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रेपो रेट बढ़ाने वाला है. RBI दिसंबर 2026 तक दो बार रेपो रेट बढ़ा सकता है.

द हिंदु के एनालिस्ट के मुताबिक अक्टूबर और दिसंबर में रेपो रेट में 0.25-0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो मौजूदा 5.25% रेपो रेट बढ़कर 6% तक पहुंच सकता है. बता दें कि 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत होता है.

ये भी पढ़ें: UPI को फ्री रहने दें, चार्ज का फैसला वापस ले सरकार- नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष

महंगाई है सबसे बड़ी चिंता
रेपो रेट बढ़ाने की संभावना की एक बड़ी वजह देश में बढ़ती महंगाई है. भारत की खुदरा महंगाई जुलाई 2026 में 4.45% से बढ़कर अगस्त में 4.82% हो गई. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सितंबर में महंगाई करीब 5% तक पहुंच सकती है. इसके अलावा कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी से भी महंगाई बढ़ने का खतरा है.

सिस्टमैटिक्स ग्रुप के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमत 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती है, तो महंगाई RBI के पहले लगाए गए अनुमान से ज्यादा हो सकती है. महंगे कच्चे तेल से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ती है. कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिससे सामान और सेवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं.

बैंकिंग सिस्टम में है पैसा
RBI के फैसले पर दूसरा बड़ा असर बैंकों के पास मौजूद अतिरिक्त पैसे यानी सरप्लस लिक्विडिटी का हो सकता है. HSBC के मुताबिक, विदेशी मुद्रा के देश में आने, खासकर FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए आने वाले पैसे से बैंकिंग सिस्टम में काफी अतिरिक्त नकदी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इससे करीब 15 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लिक्विडिटी बनी है.

बहुत ज्यादा पैसा उपलब्ध होने से अर्थव्यवस्था में महंगाई बढ़ने का खतरा हो सकता है. इसके अलावा अगर बैंक लंबे समय तक बहुत ज्यादा नकदी पर निर्भर रहते हैं तो वित्तीय स्थिरता से जुड़े जोखिम भी पैदा हो सकते हैं.

ये भी पढ़ें: UPI पर घमासान, अब मोबाइल दुकानदारों ने लिखा वित्त मंत्री को पत्र, कहा- अस्तित्व खतरे में

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment