CEO Pay: ऑक्सफैम इंटरनेशनल और इंटरनेशनल ट्रेड यूनियन कॉन्फेडरेशन (ITUC) की तरफ से जारी एक नई ग्लोबल रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में दुनिया के टॉप CEOs की सैलरी कर्मचारियों के मुकाबले 20 गुना तेजी से बढ़ी है.
एनालिसिस में बताया गया है कि एक एग्जीक्यूटिव का मुआवजा तेजी से बढ़ा, जबकि लाखों मजदूर बढ़ती कीमतों और मजदूरी में कम बढ़ोतरी से जूझते रहे. रिसर्च करने वालों ने पाया कि पिछले साल ग्लोबल CEO की सैलरी, मजदूरों की सैलरी के मुकाबले 20 गुना तेजी से बढ़ी.
फायदे में CEOs, नुकसान में वर्कर्स
साल 2025 में ग्लोबल लेवल पर CEOs की सैलरी में वास्तविक रूप से मुद्रास्फीति को एडजस्ट करने के बाद 11 परसेंट का उछाल आया. इसके विपरीत, सामान्य कर्मचारियों के वास्तविक वेतन में केवल 0.5 परसेंट की ही वृद्धि हुई 33 बड़े देशों की 1500 बड़ी कंपनियों में एक CEO की औसत सैलरी 2024 के 7.6 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 8.4 मिलियन डॉलर (करीब 70 करोड़ रुपये) हो गई.
साल 2019-2025 के बीच बढ़ती महंगाई के चलते वैश्विक स्तर पर कर्मचारियों का वास्तविक वेतन 12 परसेंट घटा है. यह कर्मचारियों द्वारा 108 दिनों तक बिना किसी वेतन के काम करने के बराबर है. वहीं, इस दौरान CEOs के कुल मुआवजे में 54 परसेंट तक की बढ़ोतरी हुई है. स्टडी में बताया गया है कि 2025 में अरबपतियों ने अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो से मिलने वाले डिविडेंड के जरिए हर सेकंड लगभग 2,500 डॉलर कमाए.
अमेरिका में सबसे ज्यादा अंतर
अमेरिका में ऐसा होते सबसे ज्यादा देखा गया. यहां S&P 500 कंपनियों के सीईओ के वेतन में 2024 से 2025 के बीच 25.6 परसेंट की भारी बढ़ोतरी हुई. इसके उलट, अमेरिका में प्राइवेट कंपनियों के वर्कर्स का प्रति घंटा वेतन इसी दौरान सिर्फ 1.3 परसेंट ही रहा. ऑक्सफैम और ITUC के इस रिपोर्ट के आधार पर सरकारों से मांग की गई है कि वे आर्थिक स्तर पर इस असमानता को कम करने के लिए CEOs के वेतन को लिमिट में रखें और अमीरों पर निष्पक्ष कर लागू करें.
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