ग्लोबल आईटी सेक्टर और शेयर बाजार में इस समय गहरी हलचल मची हुई है। दुनिया की सबसे बड़ी और दिग्गज आईटी व कंसल्टिंग कंपनियों में शुमार एक्सेंचर के शेयरों में हाल ही में 20% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह ऐतिहासिक गिरावट केवल एक कंपनी के खराब प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे वैश्विक आईटी सेक्टर के निवेशकों की नींद उड़ा दी है। निवेशकों के मन में सबसे बड़ा डर इस बात का है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) वास्तव में आईटी और कंसल्टिंग कंपनियों के व्यापार मॉडल को खत्म कर रहा है? एक तरफ नए सौदों के आंकड़ों ने शेयर बाजार में निराशा पैदा की है, वहीं दूसरी ओर कंपनी की सीईओ का मानना है कि बाजार इस पूरी तस्वीर को गलत नजरिए से देख रहा है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर एक्सेंचर के किन आंकड़ों ने आईटी शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट का माहौल बनाया है और इसका भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
एक्सेंचर के शेयरों में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
शेयर बाजार में एक्सेंचर का स्टॉक साल 2017 के बाद से अपने सबसे निचले और खराब स्तर पर पहुंच गया है। अगर हम पिछले एक साल का ट्रेंड देखें, तो कंपनी के शेयरों में लगभग 50% की लगातार और बड़ी गिरावट देखी गई है। हाल ही में वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही के नतीजे आने के बाद यह स्टॉक 18 से 20 प्रतिशत तक और टूट गया। इस भयंकर गिरावट का सीधा असर कंपनी के बाजार पूंजीकरण पर बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद जब दुनिया भर में आईटी और कंसल्टिंग का भारी बूम आया था, तब एक्सेंचर का बाजार पूंजीकरण 200 अरब डॉलर के पार चला गया था। लेकिन अब, लगातार बिकवाली और निवेशकों के घटते भरोसे के कारण यह गिरकर 80 अरब डॉलर से भी कम रह गया है। इस महा-गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह निवेशकों का वह डर है, जिसमें वे मान रहे हैं कि एआई का तेजी से बढ़ता प्रभाव उनकी कमाई और मुनाफे को पूरी तरह से निगल सकता है।