पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमा दुष्प्रचार अभियान चलाने और सिंधु जल संधि पर दुखड़ा रोने के लिए किया है. बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में गुरुवार (18 जून, 2026) को पाकिस्तान ने यूरोप में बैठकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सिंधु जल संधि पर भारत के साथ बातचीत करवाने की भीख मांगी. यहां तक कि उसने इस मामले में यूरोप को डराया भी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आंख में धूल भी झोंकी. आइए पाकिस्तान की ओर से किए एक-एक फर्जी दावे की पोल खोलते हैं-
पिछले साल पहले पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ़्टिनेट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने आतंकी हाफिज सईद का डायलॉग दोहराया था- ‘तुम पानी बंद करोगे तो हम तुम्हारी सांस बंद करेंगे.’ उससे कुछ नहीं हुआ तो पाकिस्तान ने भारत से सिंधु जल संधि पर बातचीत करने की कई बार पेशकश की. भारत ने बातचीत की पेशकश ठुकराई तो अब पाकिस्तान ने यूरोप में बैठकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की भीख मांगना, उन्हें डराना और उन्हें गुमराह करना शुरू कर दिया है.
पाकिस्तान हाई कमीशन और यूरोपीय थिंक टैंक सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी स्टडीज (CEPS) ने ब्रुसेल्स में सिंधु संधि के मुद्दे पर ‘ट्रांसबाउंड्री वॉटर रिसोर्सेज: ए वेपनाइज्ड ग्लोबल कॉमन’ नाम का एक कॉन्फ्रेंस कराई थी, जिसमें पाकिस्तान के डिप्टी PM और विदेश मंत्री इशाक डार, पर्यावरण मंत्री मुसादिक मसूद मलिक, सिंधु जल समझौते के मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष रखने वाले वकील फैसल हुसैन नकवी और भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले पत्रकार दानिश कय्यूम शामिल हुए.
इशाक डार ने की यूरोप को बरगलाने की कोशिश
इस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत इशाक डार के रिकॉर्डेड भाषण के साथ हुई, जिसमें उन्होंने सिंधु, चिनाब और रावी नदी पर चल रही भारत की परियोजनाओं पर कहा कि कैसे इनके के सहारे पाकिस्तान प्यासा मर सकता है. डार ने कहा कि सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद भारत सावलकोट, किरथाई और क्वार जैसे नई परियोजनाओं पर काम कर रहा है. बगलिहार और सलाल जैसी परियोजनाओं के विस्तार पर काम करते हुए सिंधु, चिनाब और रावी नदियों की धारा मोड़ रहा है जिससे जल संसाधनों पर भारत का वर्चस्व हो जाएगा. वैसे तो इशाक डार ने 8 मिनट 16 सेकंड का रिकॉर्डेड भाषण दिया, लेकिन पूरे भाषण में 15 से ज़्यादा कट थे.
यूरोप में बैठकर पाकिस्तान ने जमकर दुनिया को गुमराह किया. खुद को पर्यावरण प्रेमी बताते हुए इशाक डार ने कहा कि उनका देश तो पर्यावरण प्रेमी है इसी कारण विश्व के कुल ग्रीन हाउस गैस एमिशन में पाकिस्तान सिर्फ़ एक फीसदी कंट्रीब्यूट करता है. पाकिस्तान के पर्यावरण मंत्री ने इसी को आगे बढ़ाया और कहा कि पाकिस्तान तो दुनिया का सिर्फ एक फीसदी ही ग्रीन हाउस गैस एमिशन करता है जबकि भारत ग्रीन हाउस एमिशन के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है.
इशाक डार-मुसादिक मलिक के दावों का सच
अब यूरोप को गुमराह करते हुए जो इशाक डार और मुसादिक मलिक बताना भूल गए वो ये है कि पाकिस्तान पूरे विश्व में सिर्फ़ एक फीसदी ग्रीन हाउस गैस ही एमिट करना है क्यूंकि पाकिस्तान दक्षिण एशिया का बेहद पिछड़ा हुआ देश है. पूरे विश्व की 3 फ़ीसदी आबादी पाकिस्तान में रहती है, लेकिन विश्व की GDP में पाकिस्तान की हिस्सेदारी मात्र 0.4% या उससे भी कम है.
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पाकिस्तान सरकार ने फरवरी 2026 में खुद माना था कि उसके पूरे देश के 17 प्रतिशत से ज़्यादा इलाकों में 10 घंटे से ज़्यादा बिजली नहीं आती है. वहीं सबसे बड़े सूबे बलूचिस्तान के तो 74 प्रतिशत से ज़्यादा इलाक़े में 10 घंटे से ज़्यादा बिजली की कटौती रहती है. ख़ैबर पख्तूनख़्वाह के 642 इलाक़े और सिंध के 407 इलाक़े 10 घंटे से ज़्यादा हर दिन बिजली से महरूम रहते हैं. महाराष्ट्र से भी कम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था है जिसका केवल 13 फ़ीसदी हिस्सा मैनुफैक्चरिंग में है. एक व्यक्ति औसतन साल मे केवल 543 यूनिट बिजली खर्च कर पाता है जबकि एक भारतीय साल में दो गुना ज़्यादा बिजली खर्च करता है.
अफ्रीका के गरीब देशों से भी बुरा पाकिस्तान का हाल
पाकिस्तान की 70 फीसदी जनता 70 सीसी की मोटरसाइकिल चलाती है, जबकि नाइजीरिया और कांगो जैसे ग़रीब देशों में 60-70 प्रतिशत जनता 100 सीसी या उससे ऊपर की बाइक चलाती है. ऐसे में पाकिस्तान का एक प्रतिशत ग्रीन हाउस एमिशन उसका पर्यावरण प्रेम नहीं बल्कि ग़रीबी की पहचान है. यह डेटा हमने आपके सामने इसलिए रखा है क्यूंकि भारत की तरक्की से जलने वाले पाकिस्तान के पर्यावरण मंत्री मुसादिक़ ने यूरोप में बैठकर ऐसा झूठा बेतुका प्रचार किया जिसे बोलने से पहले भी कोई पढ़ा लिखा मंत्री 100 बार सोचेगा. मुसादिक मलिक ने यूरोप को गुमराह करने के लिए झूठ का पुलिंदा बनाते हुए बयान दिया कि भारत दुनिया का तीसरा बड़ा ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जक है जिस कारण तापमान बढ़ रहा है और बाढ़ आ रही है जिसकी वजह से पाकिस्तान में पिछले 15 साल में 6 हजार लोगों की मौत हो गई और 20 हजार लोग घायल हुए.
यूरोप में झूठे दावे करते रहे शहबाज के मंत्री
दुनिया के सामने अपना दुखड़ा रोते हुए मुसादिक मसूद मलिक ने असमंजस भरे अंदाज़ में कहा कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद पिछले साल बाढ़ के समय चिनाब के एक पॉइंट पर जहां 18000 क्यूसेक पानी बह रहा था वो बिना बारिश के 2 दिन में 1500 क्यूसेक पानी हो गया. मुसादिक बार-बार कहते रहे मैं कोशिश कर रहा हूं की झूठा डेटा ना बताऊं, फिर मुसादिक को याद आ गया कि यहां तो बिना बारिश के बाढ़ की बात कर रहे थे एकदम से बस डेटा पलट दिया और कहा सिर्फ एक पॉइंट पर 1500 क्यूसेक पानी से 18000 क्यूसेक पानी हो गया था पिछले साल.
यूरोप की रिपोर्ट ने ही खोली पाकिस्तान की पोल
दुनिया को गुमराह करने के इरादे से यूरोप में सिंधु जल संधि पर सम्मेलन कर रहे पाकिस्तानी मंत्री शायद ये बताना भूल गए कि दक्षिण एशिया में बढ़ रहे तापमान का प्रमुख कसूरवार उनका ही साथी देश चीन है जो विश्व में कार्बन उत्सर्जन में नंबर 1 है और अकेले विश्व का 35 कार्बन उत्सर्जन करता है. साथ ही यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (EFSAS) की स्टडी के मुताबिक, चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के नाम पर खुद पाकिस्तान ने अपने देश में 3 नए कोयले से बिजली बनाने वाले प्लांट शुरू किए, गिलगिट बाल्टिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह में हर साल एक लाख से ज़्यादा पेड़ काटे और रोजाना अकेले CPEC से जुड़े ट्रक 3 करोड़ 65 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड गैस उत्सर्जित करते हैं.
ऐसे में आंकड़े पाकिस्तानी सरकार और उनके मंत्री के झूठ की पोल खोलने को काफी हैं. सम्मेलन में पाकिस्तानी मंत्री ने यह भी कहा कि सिंधु जल समझौते के तहत आने वाले पानी से ही पाकिस्तानी की खेती हो पाती है जो उसकी GDP का 40% हिस्सा है और भारत जिस तरह से पानी रोकने का कह रहा ये युद्ध का उद्घोष है.
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शहबाज के मंत्री ने यूरोप को दिखाया डर
एक घंटे तक चले इस पहले सीज़न में पाकिस्तान ने कई झूठे बेबुनियाद दावे किए, लेकिन असल कहानी शुरू हुई दूसरे सेशन में, जहां मुसादिक मलिक ने दुखड़ा रोना शुरू किया और कहा कि बताइए अगर सिंधु जल संधि नहीं टिक सकती है तब तो यूरोप की कोई आपसी संधि नहीं टिक सकती है. आप क्या करेंगे कोर्ट जाएंगे, हम गए थे लेकिन दूसरे देश ने हमसे कहा हम न्यूक्लियर देश हैं, हम इस कोर्ट का क्षेत्राधिकार को ही चुनौती देते हैं. ये तो फिर एक मिसाल बन जाएगा और पूरा विश्व का कानूनी ढांचा मिसाल पर ही काम करता है. ऐसे में यूरोप को डराते हुए पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि फिर तो ये यूरोप के साथ भी हो सकता है. यूरोप का कोई शक्तिशाली देश खड़ा हो जाएगा और कहेगा मैं भी पानी पर ट्रीटी नहीं मानता हूं. ये बात आप तक भी पहुंचेगी क्योंकि यूरोप के भी कई देश एक दूसरे पर पानी के लिए निर्भर हैं.
पाकिस्तान के दावों का सच
यहां पाकिस्तानी मंत्री ये भूल गए कि यूरोप का कोई देश, जिस पर पानी के लिए निर्भर है उस देश में अपने नागरिकों को आतंक की ट्रेनिंग देकर उसके नागरिकों और सैनिकों को मारने के लिए नहीं भेजता है. जैसा पाकिस्तान साल 1980 से भारत के साथ लगातार बिना रुके कर रहा है. पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने वाले तीनों आतंकी पाकिस्तानी नागरिक थे. मुंबई में 26/11 आतंकी हमले को अंजाम देने वाले 10 आतंकी पाकिस्तानी नागरिक थे. उरी और पुलवामा आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकी पाकिस्तानी नागरिक थे और तो और आतंक का सारा कारोबार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और पाकिस्तानी सेना चलाती है जिसके अनगिनत सबूत दुनिया के पास हैं.
पाकिस्तान के वकील ने कबूला आतंकवाद का सच
सिंधु जल संधि के मामले में पाकिस्तान का पक्ष रखने वाले वकील फैसल हुसैन नकवी ने कम से कम इस बात को स्वीकारा कि भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित पाकिस्तान के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद को लेकर किया है, लेकिन प्रोपेगैंडा फैलाना था तो पानी को मानवाधिकार के साथ जोड़ दिया. इसके बाद बात आती है पाकिस्तान द्वारा मदद की भीख मांगने की. मुसादिक मलिक यूरोप और दुनिया से भीख मांगते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच इस मुद्दे पर द्विपक्षीय वार्ता असंभव है, लेकिन यूरोप को संयुक्त राष्ट्र को पानी के मुद्दे पर कुछ करना चाहिए, सबको बुलाना चाहिए, बात करनी चाहिए ताकि मसला सुलझ सके.
14 महीने से निलंबित सिंधु जल संधि पर पाकिस्तानी मंत्री कहते हैं कि बताइए 3 जंग और अनगिनत झड़प के बाद भी संधि खत्म नहीं हुई, लेकिन इस बार एक दम से राजनैतिक कारण की वजह से कर दी गई. यूरोप को फिर डराते हुए मुसादिक मलिक ने कहा कि हमें अपनी इतनी चिंता नहीं है, लेकिन ये मिसाल बनेगा और फिर विश्व ऐसे ही काम करेगा.

