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साल 2020-23 के कोरोना के दौर की डरावनी यादें शायद ही कोई भूल पाया होगा। कोरोना की आई तीन लहरों के दौरान अस्पतालों के बाहर लंबी कतारें, ऑक्सीजन की कमी, मास्क और सेनिटाइजर हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गए थे। हालांकि इसके बाद हालात काफी सामान्य हो गए और हम सभी मानने लगे थे कि अब खतरा टल गया है।
हालांकि कोरोना वायरस एक बार फिर से दस्तक देता दिख रहा है। पिछले करीब एक महीने से देश के कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, केरल, आंध्र-प्रदेश और तेलंगाना से संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की खबरें सामने आती रही हैं।
हाल के रिपोर्ट्स में देश के दक्षिणी राज्यों विशेषकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कोविड-19 के मामलों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी भले ही महामारी के दौर जैसी नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे नजरअंदाज करने की गलती न करने की सलाह दे रहे हैं। राज्य सरकारों ने निगरानी बढ़ा दी है, अस्पतालों को सतर्क रहने को कहा गया है और संदिग्ध मामलों की टेस्टिंग की जा रही है।
अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि इस बार बढ़ते मामलों के लिए मुख्यरूप से ओमिक्रॉन के RF.5 सब-वेरिएंट को कारण माना जा रहा है।
आइए जान लेते हैं कि देश में फिलहाल कैसे हालात है?

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कोरोना संक्रमण
– फोटो : Adobe Stock Photos
आंध्र प्रदेश में संक्रमण के करीब 50 मामले
आंध्र प्रदेश में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार संक्रमण के मामलों में वृद्धि की खबरें सामने आती रही हैं।
- एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार शनिवार (25 जुलाई) को राज्य में कोविड-19 के 10 नए मामले सामने आए। इसके साथ कुल मामलों की संख्या बढ़कर 49 हो गई है।
- राज्य में अब तक कोरोना से चार लोगों की मौत भी हो चुकी है।
- फिलहाल, 24 मरीज अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, जबकि 16 मरीज मेडिकल देख-रेख में घर पर ठीक हो रहे हैं।
- अब तक, पांच लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं और उन्हें अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी गोदावरी जिले में सबसे ज्यादा 11 मामले दर्ज किए गए हैं। गुंटूर में नौ मामले दर्ज किए गए, इसके बाद कडप्पा में आठ, विशाखापत्तनम में पांच, एनटीआर में तीन और काकीनाडा, एलुरु और बापटला में दो-दो मामले सामने आए।

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कोविड-19 का अलर्ट
– फोटो : Adobe Stock
तेलंगाना में भी अलर्ट
तेलंगाना में भी कोरोना के मामलों को लेकर अलर्ट किया जा रहा है।
तेलंगाना के पब्लिक हेल्थ और परिवार कल्याण निदेशक डॉ. बी. रविंदर नायक ने शुक्रवार को बताया था कि कोविड-19 के मामलों में अभी जो बढ़ोतरी दिख रही है, वह हल्की है और पिछले साल इसी समय देखे गए ट्रेंड जैसी ही है। इसको लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं।
- ऐसी जगहों पर जाने से बचें जहां भीड़-भाड़ ज्यादा हो।
- संक्रमण से बचाव के ये उपाय सांस की अन्य बीमारियों के खतरे को कम करने में भी मददगार हो सकते हैं, क्योंकि इस समय मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
- हम केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार निगरानी बनाए हुए हैं।

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कोरोना की तैयारियां
– फोटो : Adobe stock
अस्पतालों को किया गया है अलर्ट
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रभावित शहरों में अस्पतालों में अलर्ट किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी अस्पताल टेस्टिंग और इलाज की सुविधा देने के लिए तैयार हैं। अस्पतालों में खास कोविड-19 बेड तैयार रखे गए हैं। सेकेंडरी-लेवल के अस्पतालों से भी आइसोलेशन बेड अलग रखने के लिए कहा गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया है कि देश में कोविड-19 की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। मंत्रालय ने इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी), इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर), क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेजवेल्लोर और अन्य विशेषज्ञ एजेंसियों के आकलन का हवाला दिया है।

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कोरोना से बचाव कैसे करें?
– फोटो : Adobe Stock
कोरोना से बचाव के उपाय करें
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में कुछ मरीजों में ओमिक्रॉन RF.5 सब-वेरिएंट की पहचान हुई है। यह ओमिक्रॉन परिवार का ही एक सब-वेरिएंट है। हालांकि डब्ल्यूएचओ ने इसे ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित’ नहीं किया है। इसका मतलब है कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि यह पहले के वेरिएंट की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी या मृत्यु का कारण बन रहा है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड से बचाव के लिए वही उपाय आज भी सबसे प्रभावी माने जाते हैं जो महामारी के दौरान अपनाए गए थे।
- बीमार होने पर घर पर आराम करें, दूसरों के संपर्क में आने से बचें।
- भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क का उपयोग करें।
- हाथों को साबुन से धोना या अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का इस्तेमाल संक्रमण के जोखिम को कम करता है।
- यदि किसी परिवार में बुजुर्ग या गंभीर बीमारी से पीड़ित सदस्य हैं तो उनके आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

