एक मोबाइल नंबर बदला गया, ईमेल में सिर्फ तीन अक्षर का फेरबदल हुआ और सरकारी खाते से करोड़ों रुपये निकलते चले गए। हरियाणा के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक मामले में सीबीआई की चार्जशीट में दर्ज घटनाक्रम किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगता। जिस बैंक खाते का मोबाइल नंबर सरकारी अधिकारी के नाम पर होना चाहिए था वह दूसरे मुख्य आरोपी के रिश्तेदार का मिला।
असली ईमेल आईडी की हूबहू एक दूसरी ई-मेल आईडी बनाई गई ताकि बैंक के अलर्ट और जरूरी सूचनाएं विभाग के पास न पहुंचें। इसी हेराफेरी के जरिये एचएसपीसीबी (हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के खाते से 47 बार में 187.26 करोड़ रुपये निकाले गए। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक एचएसपीसीबी का बैंक खाता 10219084990 27 फरवरी 2025 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर- 32 शाखा में खोला गया था।
अलर्ट अफसरों तक पहंुचने के रास्ते बंद किए
खाता खुलवाने की प्रक्रिया में आरोपी आईडीएफसी बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार की अहम भूमिका थी। खाता खोलने के फॉर्म में एचएसपीसीबी के वरिष्ठ लेखा अधिकारी परवीन कुमार का मोबाइल नंबर दर्ज था। यही नंबर बैंक के लिए विभाग से संपर्क का प्रमुख माध्यम था। अगर यही नंबर खाते में रहता तो बैंक से आने वाले ट्रांजेक्शन अलर्ट और दूसरी महत्वपूर्ण सूचनाएं सीधे संबंधित अधिकारी तक पहुंचतीं।
परवीन कुमार की जगह अभिषेक सिंगला का नंबर
अभय कुमार ने परवीन कुमार के नंबर को फॉर्म में काट दिया और उसकी जगह 8699700253 नंबर दर्ज किया गया। जांच में यह नंबर अभिषेक सिंगला के नाम पर पंजीकृत मिला। अभिषेक को चार्जशीट में अभय कुमार का साढ़ू भाई बताया गया है। यानी सरकारी खाते में दर्ज मोबाइल नंबर सरकारी अधिकारी का नहीं बल्कि आरोपी पक्ष से जुड़े व्यक्ति का था।
ऐसे किया ईमेल में खेल
बैंक की महत्वपूर्ण सूचनाएं ईमेल के जरिए भी भेजी जानी थीं। चार्जशीट के मुताबिक यहां भी इसी तरह जालसाजी की गई। एचएसपीसीबी की वास्तविक ईमेल आईडी थी hspcbacctt13@gmail.com। साजिशकर्ताओं ने इसके समान दिखने वाली दूसरी ईमेल आईडी hspcbaacttl3@gmail.com बनाई। दोनों को गौर से देखने पर ही अंतर पकड़ में आता है। फर्जी ईमेल में अंग्रेजी वर्णमाला के ए के स्थान पर डबल ए और डबल सी की जगह एक सी लिखा। असली ईमेल में जहां अंक 1 है फर्जी ईमेल वहां अंग्रेजी वर्णमाला का स्मॉल एल लिखा गया।


