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सोने पर कितनी विदेशी मुद्रा खर्च करती है सरकार, PM मोदी को आखिरकार क्यों करनी पड़ी न खरीदने की अपील?

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  • प्रधानमंत्री मोदी ने डॉलर बचाने को सोना खरीदने से रोकने का आग्रह किया.
  • ईरान युद्ध और तेल की बढ़ी कीमतों से रुपये पर पड़ रहा दबाव.
  • भारी सोने के आयात से चालू खाता घाटा बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है.
  • सोने की खरीद कम करने से देश के अरबों डॉलर बचेंगे.

PM Modi’s Appeal Logic: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल फिलहाल में एक ऐसी अपील की है, जिसकी चर्चा पूरे देश में है. रविवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, ”एक साल तक सोना न खरीदें, विदेश यात्रा टाल दें और जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम करें.” उनके ऐसा कहने की सीधी सी वजह है- डॉलर बचाएं, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को सिक्योर रखें.

उनकी यह अपील ईरान में जंग और उसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी और रुपये पर पड़ रहे दबाव के बीच आई है. अब सवाल यह आता है कि सोने की खरीद टालने और देश की विदेशी मुद्रा की स्थिति को ठीक-ठाक रखने के बीच क्या कनेक्शन है? आइए पूरा गणित समझते हैं. 

यहां समझें पूरा गणित

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स द्वारा जुटाए गए डेटा के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 690.69 बिलियन डॉलर है. RBI की डेटा से पता चलता है कि फरवरी में देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर लगभग 728 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन अप्रैल में वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के कारण यह फिर से घटकर लगभग 691 बिलियन डॉलर पर आ गया.

इस बीच IMF ने अनुमान लगाया है कि 2026 में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़कर 84.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो GDP का लगभग 2 परसेंट होगा. CAD के बढ़ने का सीधा सा मतलब है: देश में आने वाले डॉलर के मुकाले बाहर जाने वाले डॉलर की मात्रा अधिक होना. दरअसल, सोने का भुगतान डॉलर में करना होता है इसलिए भारी मात्रा में सोने की खरीद से चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ता है और डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया कमजोर होता है.

वित्त वर्ष 26 में भारत ने लगभग 72 बिलियन डॉलर के मूल्य का सोना आयात किया, जो पिछले साल की तुलना में 24 परसेंट ज्यादा है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का खरीदार है।.इस सोने का अधिकांश हिस्सा आयात किया जाता है और इसके हर औंस का भुगतान डॉलर में किया जाता है. 

  • वित्त वर्ष 26 में कुल आयात बिल: 775 बिलियन डॉलर
  • केवल चार वस्तुओं की लागत: 240+ बिलियन डॉलर
  • कच्चा तेल: 134.7 बिलियन डॉलर
  • सोना: 72 बिलियन डॉलर
  • वनस्पति तेल: 9.5 बिलियन डॉलर
  • उर्वरक: 14.5 बिलियन डॉलर

ये चार चीजें भारत के कुल आयात का 31.1 परसेंट है. अकेले सोना ही कुल आयात बिल का लगभग 10 परसेंट है. यही कारण है कि PM मोदी ने नागरिकों से इन चीजों का इस्तेमाल कम करने का आग्रह किया है.

सोने की मांग कम हो गई तो क्या होगा?

अगर अगले एक साल तक सोने की खरीद में कमी आती है, तो भारत सोने के आयात में 20-25 अरब डॉलर तक बचा सकता है. सोने के आयात में 50 परसेंट की गिरावट से 36 अरब डॉलर तक बचाया जा सकता है. यह अनुमानित CAD (चालू खाता घाटा) का लगभग आधा है.

आसान शब्दों में कहें तो: एक साल तक सोना न खरीदने से भारत से डॉलर का बाहर जाना सीधे तौर पर कई अरब डॉलर तक कम हो सकता है. ऐसे समय में जब कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है और भारत अपनी तेल की जरूरतों का 88 परसेंट आयात करता है, तो बचाए गए ये डॉलर बहुत मायने रखते हैं. इनका इस्तेमालजरूरी ऊर्जा आयात का भुगतान करने के लिए किया जा सकता है.

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