भोजपुर के बेलौटी गांव में हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सातवें दिन आखिरकार शासन-प्रशासन को पीछे हटना पड़ा है। लगातार बढ़ते चौतरफा दबाव के बाद, अब मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन पर जगदीशपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार और एनकाउंटर टीम में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
समस्या पूछने के बहाने ले गए, फिर सरेंडर के बाद दाग दीं 5 गोलियां
मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी ने 18 जून को ही भोजपुर के पुलिस एसपी राज को लिखित आवेदन दिया था। आशा देवी ने आवेदन में बताया है कि 17 जून की सुबह करीब 8 बजे शाहपुर थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मी जगदीशपुर एसडीपीओ के नेतृत्व में उनके घर पहुंचे। पुलिस टीम ने भरत से कहा कि जवनियां गांव के बाढ़ विस्थापित जहां रह रहे हैं, वहां हमारे साथ चलो और उनकी समस्याओं व मांगों को समझाने में मदद करो। बकौल मां, जब भरत जवनियां गांव के बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचा, तो उसने फेसबुक पर लाइव होकर जनता की मांगें उठाईं। इसके तुरंत बाद उसने अपना हथियार जमीन पर फेंक दिया और खुद को पूरी तरह पुलिस के हवाले कर दिया। आशा देवी ने आरोप लगाते हुए कहा कि हथियार फेंकने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने भरत को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा के सीधे आदेश पर पुलिसकर्मियों ने सरेंडर कर चुके भरत पर ताबड़तोड़ 5 गोलियां दाग दीं और उसे लहूलुहान हालत में अपने साथ ले गए।
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बुजुर्ग पिता को दिनभर थाने में रखा बंधक
पीड़ित परिवार ने पुलिस पर प्रताड़ना का एक और गंभीर आरोप लगाया है। मां ने बताया कि इस खूनी खेल को अंजाम देने के बाद पुलिस ने भरत के बुजुर्ग पिता काशीनाथ तिवारी को पूरे दिन शाहपुर थाने में अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा। इसके बाद शाम को परिवार को सूचना दी गई कि इलाज के दौरान उनके बेटे की मौत हो गई है।
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