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पार्टनर छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाता है? बात बिगड़ने से पहले अपनाएं ये 5 तरीके

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रिश्तों में होने वाले इस रोज-रोज के झगड़े को लेकर ‘गॉटमैन इंस्टीट्यूट’ (जो कि कपल्स के रिश्तों पर रिसर्च करने वाली एक जानी-मानी इंस्टिट्यूट है) ने काफी काम किया है. उनका मानना है कि दो लोगों की सोच हर बात पर एक जैसी हो, यह बिल्कुल जरूरी नहीं है. असली बात तो यह है कि जब दोनों की राय अलग हो, तो वे उस वक्त एक-दूसरे से किस तरह बात करते हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए कुछ सीधे-सादे तरीके हैं, जिन्हें अपनाकर आप बढ़ती हुई बहस को रोक सकते हैं.

पार्टनर गुस्सा करे तो आप भी तुरंत मत भड़किए

सामने वाला गुस्से में हो तो खुद को शांत रखना कोई बच्चों का खेल नहीं है. कई बार मन करता है कि वह जिस टोन में बात कर रहा है, उसे भी उसी लहजे में करारा जवाब दिया जाए. आपको शायद यह मालूम न हो, लेकिन बात यहीं से बिगड़नी शुरू होती है. अगर दोनों ही अपनी आवाज ऊंची कर लेंगे, तो एक छोटी सी शिकायत भी बड़े झगड़े का रूप ले लेगी. इसलिए ऐसी सिचुएशन में सबसे पहले खुद पर कंट्रोल रखें. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप दब जाएं या अपनी बात न कहें.

अपनी बात जरूर रखिए, लेकिन शुरुआत में ही सामने वाले पर उंगली उठाना बंद कीजिए. जैसे, “तुम तो हर बात पर चिल्लाने लगते हो” कहने के बजाय आप ऐसे कह सकते हैं, “जब हमारी जरा सी बात भी बहस में बदल जाती है, तो मुझे बहुत बुरा लगता है. क्या हम इसे आराम से बैठकर सुलझा सकते हैं?” गॉटमैन इंस्टिट्यूट भी यही कहता है कि जब भी किसी मुद्दे पर बात शुरू करें, तो अपनी टोन हमेशा सॉफ्ट और शांत रखें. आसान भाषा में कहें तो अपनी दिक्कत बताइए, लेकिन बात शुरू होते ही सामने वाले को गुनहगार मत ठहराइए.

keep softer tone
keep softer tone

कुछ तरह की बातें कहना बंद कर दें

झगड़े के समय पर हम अक्सर ऐसी बातें बोल जाते हैं, जो दिमाग शांत होने पर शायद कभी न बोलें. जैसे, “तुम तो हमेशा ऐसा ही करते हो!”, “तुम कभी मेरी बात सुनते ही नहीं हो!” या “तुम्हें तो मेरी कोई परवाह ही नहीं है!” ऐसी बातें सुनकर सामने वाला अपनी गलती मानने के बजाय उलटा आपसे बहस करने लगेगा ताकि वो खुद को सही साबित कर सके. इसके बाद दोनों ही पार्टनर अपनी-अपनी जिद पर अड़ जाते हैं और जो असली मुद्दा था, वो कहीं गायब ही हो जाता है.

इससे बेहतर यह है कि जिस चीज से आपको दिक्कत हुई है, सिर्फ उसी के बारे में साफ-साफ बोलने की आदत डाल लें. मान लीजिए आपने पार्टनर से कुछ कहा और उन्होंने आपकी बात बीच में ही काट दी. ऐसे में आप कह सकते हैं, “जब तुमने मेरी बात बीच में ही रोक दी, तो मुझे लगा कि मेरी बात पूरी सुनी ही नहीं गई.” इस तरह आप अपनी परेशानी भी बता रहे हैं और सामने वाले पर सीधा इल्जाम भी नहीं लगा रहे. एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब भी आप अपनी बात रखें तो पार्टनर को दोष देने के बजाय अपनी फीलिंग्स बताएं कि आपको कैसा लगा, न कि यह कि सामने वाला हमेशा गलत ही होता है.

stop saying certain things
stop saying certain things

गुस्सा बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो थोड़ी देर के लिए ब्रेक ले लें

कई बार बहस इतनी आगे निकल जाती है कि दोनों का पारा हाई हो जाता है. उस समय सामने वाला क्या कह रहा है, यह सुनना भी मुश्किल होता है और अपनी बात समझाना तो बिल्कुल नामुमकिन हो जाता है. ऐसे में जबरदस्ती बहस को खींचने से बात सिर्फ बिगड़ेगी. अगर आपको लगे कि अभी बात करने से माहौल और खराब होगा, तो थोड़ी देर के लिए रुक जाना ही समझदारी है. आप अपने पार्टनर से बोल सकते हैं, “अभी हम दोनों बहुत गुस्से में हैं. थोड़ा दिमाग ठंडा हो जाए, फिर आराम से बात करते हैं.” गॉटमैन इंस्टिट्यूट के अनुसार, जब बहस में बहुत स्ट्रेस बढ़ जाए, तो कम से कम 20 मिनट का ब्रेक ले लेना चाहिए. लेकिन इस बात का ख्याल रहे कि इस ब्रेक का मतलब पार्टनर को इग्नोर करना, मुंह फुलाना या बिना बताए भाग जाना नहीं है. इसका मकसद सिर्फ इतना है कि दोनों के दिमाग का गुस्सा शांत हो जाए, ताकि दोबारा सही से बात हो सके.

इस ब्रेक के दौरान दिमाग में बार-बार उसी झगड़े की बातें मत दोहराते रहिए. थोड़ा टहल लीजिए, पानी पी लीजिए या कोई ऐसा काम कीजिए जिससे दिमाग डायवर्ट हो. इसके बाद बात पूरी करने के लिए वापस आना बहुत जरूरी है. यानी ब्रेक लेने का मतलब प्रॉब्लम से भागना नहीं है, बल्कि शांत होकर उसे सॉल्व करना है.

take a break
take a break

एक ही झगड़े में पुरानी सारी बातें मत उखाड़िए

अक्सर होता यह है कि बहस शुरू तो आज की किसी छोटी सी बात से होती है, लेकिन 5 मिनट में पुरानी गड़े मुर्दे उखड़ने लगते हैं. आज पार्टनर ने कोई काम नहीं किया, तो बात वहां से शुरू हुई. लेकिन थोड़ी देर बाद पिछले महीने की गलती और फिर दो साल पुरानी बात बीच में आ गई. जब ऐसा होता है, तो झगड़ा खत्म होने के बजाय लंबा खिंचता चला जाता है. इसलिए कोशिश कीजिए कि अभी जिस बात पर बहस हुई है, सिर्फ उसी पर ध्यान दें. इसका मतलब यह नहीं है कि पुरानी बातों को भूल जाएं. अगर कोई पुरानी बात आज भी आपको खटक रही है, तो उस पर बात करना जरूरी है, लेकिन उसके लिए अलग से शांत माहौल में समय निकालें. एक साथ शिकायतों का ढेर लगा देने से बात बहुत कड़वी हो जाती है और असली प्रॉब्लम का कोई सॉल्यूशन नहीं निकलता.

stop digging old topics
stop digging old topics

बात बिगड़ने लगे तो उसे तुरंत संभालने की कोशिश कीजिए

रिश्ते में होने वाली किसी भी बहस का मतलब यह नहीं होता कि किसी एक को जीतना है और दूसरे को हराना है. कई बार सबसे ज़रूरी बात यह होती है कि दोनों एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें और बिगड़ते माहौल को संभाल लें. अगर आपको लगे कि बात गलत डायरेक्शन में जा रही है, तो माहौल को थोड़ा ठंडा करने की कोशिश कीजिए. आप कह सकते हैं, “मैं तुमसे लड़ना नहीं चाहता या फिर चाहती हूं. हम अगर चाहें तो आराम से भी बात कर सकते हैं.” अगर आपको लगे कि आपने अपनी बात सही तरीके से नहीं रखी, तो आप यह भी कह सकते हैं, “शायद मैंने अपनी बात सही तरीके से नहीं कही, मैं दोबारा समझाता हूं.” इस बीच अगर आपको लगे कि गलती आपकी है, तो बिना झिझक के “सॉरी” बोल दीजिए.

गॉटमैन इंस्टिट्यूट ऐसी कोशिशों को ‘रिपेयर अटेम्प्ट’ कहता है. आसान भाषा में कहें तो जब बात बिगड़ने लगे, तो उसे तुरंत सही ट्रैक पर लाने की कोशिश करना. यह माफी मांगकर, थोड़ी नरमी दिखाकर या अपनी बात को बेहतर तरीके से दोबारा रखकर किया जा सकता है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर झगड़े में सिर्फ आपको ही झुकना है, बल्कि दोनों ही लोगों को अपनी-अपनी गलती समझनी चाहिए और बात संभालनी चाहिए.

try to make things better
try to make things better

सिर्फ गुस्सा अलग चीज है और टॉक्सिक रिश्ता बिल्कुल अलग

पार्टनर का कभी-कभार गुस्सा होना या बहस होना एक बात है, लेकिन रिश्ते में लगातार गाली-गलौज, धमकियां मिलना, डर का माहौल होना या मारपीट होना बिल्कुल अलग बात है. अगर आपके रिश्ते में लगातार आपको डराया जाता है, धमकी दी जाती है या आपके साथ हिंसा होती है, तो सिर्फ बातचीत का तरीका बदलने से काम नहीं चलेगा. ऐसी सिचुएशन में किसी भरोसेमंद इंसान, परिवार के बड़ों या किसी एक्सपर्ट यानी कि काउंसलर या पुलिस की मदद लेना बहुत जरूरी है. हर रिश्ते में दो लोगों की सोच एक जैसी हो, यह पॉसिबल नहीं है. रिश्ते में मतभेद होना एक बहुत ही नॉर्मल सी बात है. लेकिन हर छोटी बात को बड़ा झगड़ा बनाना जरूरी नहीं है.

गॉटमैन इंस्टिट्यूट की रिसर्च भी इसी बात पर जोर देती है कि पार्टनर आपस में मतभेद होने पर भी बात को संभालना सीखें. अपनी बात प्यार से रखना, सामने वाले पर सीधे इल्जाम न लगाना, गुस्सा बढ़ने पर 20 मिनट का ब्रेक लेना और शांत होकर बात को संभालना, ये कुछ ऐसे सिंपल तरीके हैं जो किसी भी रिश्ते को टूटने या कड़वा होने से बचा सकते हैं.

understand the difference
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