महाराष्ट्र सरकार की ओर से यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाई गई समिति के सदस्य के तौर पर पूर्व जस्टिस आर.सी. चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफे की वजह जनता से सुझाव लेने की प्रक्रिया को लेकर मतभेद बताया। इसके साथ ही, उन्होंने बैठक में समिति के सदस्य नहीं होने वाले एक व्यक्ति की कथित मौजूदगी और उसकी भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
राज्य सरकार ने इस्तीफे को कब स्वीकार किया?
बता दें कि जस्टिस आरसी चव्हाण का यह फैसला यूसीसी समिति की दूसरी बैठक के दो दिन बाद आया है। राज्य में यूसीसी को लागू करने के लिए नियम और सिफारिशें तैयार करने के लिए जुलाई में सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। न्यायमूर्ति चव्हाण ने समिति की ऑनलाइन बैठक के कुछ घंटों बाद 19 सितंबर को अपना इस्तीफा भेज दिया। राज्य सरकार ने सोमवार को इसे स्वीकार कर लिया।
न्यायमूर्ति चव्हाण ने मेले में क्या बताया?
समिति को भेजे गए अपने ईमेल में न्यायमूर्ति चव्हाण ने कहा कि बैठक के प्रमुख एजेंडा मदों में से एक यूसीसी पर जनता की प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए प्रश्नावली को अंतिम रूप देना था। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यों ने सुझाव दिए हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि उत्तरदाताओं को केवल हां या ना में उत्तर देने के लिए कहा जाना चाहिए। इसके साथ ही प्रश्नावली की समीक्षा समिति सदस्य डॉ. सुवर्णा रावल की देखरेख में प्रोफेसरों की ओर से पेशेवर रूप से की जानी चाहिए।
हालांकि, चव्हाण ने कहा कि समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना देसाई ने पहले ही उनके ओर से अंतिम रूप दी गई प्रश्नावली को प्रसारित कर दिया है। वहीं, कहा है कि वेबसाइट तैयार होने के बाद इसे अपलोड कर दिया जाएगा।
न्यायमूर्ति चव्हाण ने क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आगे कहा कि अब उन्हें इसका मकसद अलग तरह से समझ आया है। लोगों को खास सवालों के जवाब हां या ना में देने का मौका देना, जिससे बाद में डेटा का एनालिसिस करना आसान हो जाए। ईमेल में यह भी आरोप लगाया गया कि कमेटी की बैठक में एक ऐसा व्यक्ति मौजूद था जो कमेटी का सदस्य नहीं था। न्यायमूर्ति चव्हाण के अनुसार, उस व्यक्ति ने कहा कि राज्य के अधिकारियों की ओर से तैयार की गई वेबसाइट में और बदलाव की जरूरत है, जिसके बाद कमेटी के चेयरमैन ने अधिकारियों को एक हफ्ते के अंदर जरूरी बदलाव करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति चव्हाण ने कहा कि उन्हें उस व्यक्ति की भूमिका के बारे में पक्का पता नहीं था जो कमेटी का सदस्य न होने के बावजूद बैठक में शामिल हुआ था। उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति के सुझाव से उन्हें यह अंदाजा हुआ कि शायद राज्य के अधिकारी खुद को इस काम को संभालने के काबिल नहीं समझते।
न्यायमूर्ति चव्हाण ने और क्या कहा?
उन्होंने कहा, ‘इस समस्या को हल करने के लिए, मैं अभी इस्तीफा देकर कमेटी से अपनी सीट छोड़ रहा हूं, ताकि सरकार तुरंत उस खाली जगह को भर सके।’ उन्होंने यह भी कहा कि एक स्वतंत्र नागरिक के तौर पर, वह अपनी राय रखने के लिए आजाद रहेंगे। यह मेरे दिल के करीब एक विषय पर सीखने का बहुत अच्छा अनुभव था।’


