पर्दे पर गंभीर और चैलेंजिंग किरदारों के लिए पहचान बनाने वाले केके मेनन अभिनय को अलग नजरिए से देखते हैं। उनका मानना है कि किसी भी किरदार को निभाने से पहले उसे अपने भीतर तलाशना जरूरी है।
‘आदर्श बाल विद्यालय’ के प्रमोशन के दौरान अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने अभिनय, किरदार और अपने काम को लेकर खुलकर बात की।
बुरे किरदार भी अंदर से आते हैं
सीरीज में अपने किरदार ज्ञानेश्वर पर बात करते हुए केके मेनन कहते हैं, ‘अगर मैं अपने भीतर से ज्ञानेश्वर को नहीं निकालूंगा तो मैं फेक एक्टिंग कर रहा होऊंगा। मैं जो भी करता हूं, उसमें बुरे किरदार भी मेरे भीतर से ही आते हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह सिर्फ एक्टिंग रह जाएगी। इसलिए मैं हमेशा कहता हूं कि जब मैं कोई बहुत बुरा किरदार निभा रहा होता हूं तो ‘एक्शन’ और ‘कट’ के बीच मुझसे मत उलझना। क्योंकि उस वक्त मैं केके मेनन नहीं होता। मैं अपने भीतर की उसी बुराई को जी रहा होता हूं। मैं हर किरदार को इसी तरह अप्रोच करता हूं।’

