लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

मिट्टी की दीवारों से सोशल मीडिया तक पहुंची झारखंड की सोहराई पेंटिंग, जानिए क्यों खास है यह कला

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

Sohrai Painting: झारखंड की सोहराई पेंटिंग सिर्फ एक चित्रकला नहीं, बल्कि प्रकृति, खेती, पशुओं और आदिवासी जीवन से जुड़ी एक पुरानी परंपरा है. इसका प्रमुख केंद्र हजारीबाग और आसपास के इलाके हैं. आमतौर पर फसल के बाद सोहराई पर्व के दौरान महिलाएं इसे मिट्टी की दीवारों पर बनाती हैं. इसमें पशुओं और प्रकृति के प्रति लगाव भी दिखाई देता है.

प्रकृति से मिले रंग, हाथों से बनी आकृतियां

सोहराई की सबसे बड़ी खासियत इसके प्राकृतिक रंग हैं. लाल और पीली मिट्टी, सफेद मिट्टी और काले रंग के लिए आसपास मिलने वाली प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. उंगलियों, टहनियों और दूसरे साधारण साधनों से दीवार पर आकृतियां बनाई जाती हैं. हाथी, हिरण, बैल, पक्षी, पेड़-पौधे और दूसरी आकृतियां इसमें आम हैं.

पुराने शैलचित्रों से मिलती हैं कई समानताएं

हजारीबाग क्षेत्र के पुराने शैलचित्रों और आज की सोहराई कला में कई समानताएं दिखाई देती हैं. इस इलाके की गुफाओं और चट्टानों पर जानवरों और प्रकृति से जुड़े पुराने चित्र मिले हैं. झारखंड पर्यटन की जानकारी में भी सोहराई के चित्रों और पुराने शैलचित्रों के बीच समानता का जिक्र किया गया है. इसलिए सोहराई को इस इलाके की पुरानी कला परंपरा से जुड़ी ऐसी कला माना जाता है, जो आज भी चली आ रही है.

GI पहचान से बढ़ा कला का महत्व

सोहराई-खोवर पेंटिंग के लिए GI आवेदन 23 अगस्त 2019 को दाखिल हुआ. इसका GI जर्नल 10 जनवरी 2020 को प्रकाशित हुआ और आधिकारिक पंजीकरण प्रमाणपत्र 14 सितंबर 2021 को जारी किया गया. इसका भौगोलिक क्षेत्र झारखंड दर्ज है. समय के साथ पक्के मकानों की संख्या बढ़ने से मिट्टी की दीवारों पर सोहराई बनाने की जगह कम हुई है. इसके बाद कलाकारों ने इसे कैनवास, कागज, कपड़े और दूसरे सामान पर भी बनाना शुरू किया. इससे यह कला नए लोगों तक पहुंचने लगी.

सोशल मीडिया ने पहुंचाया नए लोगों तक

इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सोहराई के चित्र, कलाकारों के काम और इसे बनाने का तरीका लोगों तक पहुंच रहा है. इससे इस पुरानी कला को देश और दुनिया के नए लोगों तक पहुंचने का मौका मिला है.

2025 में राष्ट्रपति भवन तक पहुंची सोहराई

सोहराई को 2025 में देश के बड़े मंच पर भी जगह मिली. 14 से 24 जुलाई 2025 तक आयोजित कला उत्सव में हजारीबाग की 10 सोहराई कलाकारों ने हिस्सा लिया. राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला दिखाई. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी कलाकारों से मुलाकात की.

कला के साथ कमाई का जरिया भी

सोहराई अब सिर्फ घर की दीवारों तक सीमित नहीं है. यह ग्रामीण महिला कलाकारों के लिए कमाई का जरिया भी बन रही है. आज सोहराई के डिजाइन कपड़ों, बैग, सजावटी सामान और दूसरी चीजों पर भी दिखाई देते हैं. कभी मिट्टी की दीवारों पर बनने वाली यह कला अब कैनवास, कपड़ों, दूसरे सामान और सोशल मीडिया तक पहुंच चुकी है. यही बदलाव इस पुरानी कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद कर रहा है.

यह भी पढ़ें: मधुबनी पेंटिंग ही नहीं, अरिपन भी है मिथिला की पहचान; जानिए इसके बिना क्यों अधूरा है हर शुभ काम

The post मिट्टी की दीवारों से सोशल मीडिया तक पहुंची झारखंड की सोहराई पेंटिंग, जानिए क्यों खास है यह कला appeared first on Prabhat Khabar.

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment