विदेशी कंपनियों से हथियारों के सौदों में होने वाली दलाली के चलते भारत में मंत्रियों से लेकर मिलिट्री कमांडर्स तक को इस्तीफे देने पड़े. यहां तक सरकारें को सत्ता से हाथ धोना पड़ा, लेकिन अब खबर है कि भारत की एक कंपनी के चलते, उत्तरी यूरोपीय देश एस्टोनिया के रक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ गया है. मामला, यूक्रेन को तोप के गोले सप्लाई करने से जुड़ा है.
एस्टोनिया के रक्षा मंत्री होना पेवकुर को यूक्रेन के लिए आर्टेलरी शेल (तोप के गोलों) के सौदे को लेकर इस्तीफा देना पड़ा है. क्योंकि इटली की जिस कंपनी डाटासेल से ये सौदा किया गया था, उसने आज तक एक भी तोप का गोला नहीं बनाया था. इस कंपनी को कुछ समय पहले भारत (महाराष्ट्र) की एक कंपनी ने खरीदा था. कुल सौदा करीब 70 मिलियन यूरो का था (करीब 800 करोड़ रुपये).
जानकारी के मुताबिक, एस्टोनिया ने इस सौदे के लिए यूरोप में फ्रीज रशिया के अकाउंट से पैसा लिया था. इस सौदे से खरीदे जाने वाले तोप के गोले, यूक्रेन को सप्लाई किए जाने थे ताकि जंग के मैदान में रूस के खिलाफ इस्तेमाल किए जा सके. लेकिन एस्टोनिया की ऑडिट एजेंसी ने इस सौदे को लेकर डाटासेल कंपनी की क्षमताओं पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद इस्तीफा हुआ.
इस्तीफे के बाद, एस्टोनिया के रक्षा मंत्री ने अपना बचाव में कहा कि सौदे से जुड़ी फाइलों को नहीं पढ़ा था. रक्षा मंत्री का काम, सौदों को मंजूरी देना होता है, लेकिन नैतिक आधार पर इस्तीफा जरूरी है. वर्ष 2022 में पेवकुर ने एस्टोनिया के रक्षा मंत्री का पद संभाला था. पेवकुर को तत्कालीन प्रधानमंत्री काजा कैलिस (2021-24) का करीबी माना जाता है. कैलिस ने एस्टोनिया के पीएम पद से इस्तीफा देकर यूरोपीय संघ (EU) के सिक्योरिटी और डिप्लोमेसी के प्रमुख का पद संभाला है. कैलिस को रूस का धुर-विरोधी माना जाता है और रूस की घेराबंदी करने के लिए ईयू में अहम पद संभाला है.
दरअसल, एस्टोनिया (पूर्व सोवियत संघ देश) का रूस के साथ छत्तीस का आंकड़ा रहता है. ऐसे में रूस के खिलाफ यूरोप के दूसरे देशों की तरह एस्टोनिया भी यूक्रेन की मदद कर रहा है. लेकिन सीधे मदद ना कर, एस्टोनिया और दूसरे देश, यूक्रेन को गोला-बारूद सप्लाई कर रहे हैं ताकि रूस के खिलाफ जंग को लंबा खींचा जा सके. उसी कड़ी में एस्टोनिया ने इटली (भारत) की कंपनी से करार किया था. इस मामले पर भारत की कंपनी का पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है.


