- भारतीय प्लेट के टकराव से यह क्षेत्र भूकंपीय सक्रिय रहता है।
पश्चिमी तिब्बत में गुरुवार (3 सितंबर, 2026) को कुछ घंटों के अंदर लगातार दो बार भूकंप आए. खास बात यह है कि दोनों भूकंप का केंद्र लगभग एक ही जगह था. यह जगह कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील से करीब 100 किलोमीटर दूर है. हालांकि, भूकंप का केंद्र कैलाश पर्वत के ठीक नीचे या उसके पास नहीं था. भारत के नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी यानी NCS के मुताबिक, अभी तक भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है.
जानकारी के मुताबिक, पहला भूकंप दोपहर 1:46:38 बजे पर आया. इसकी तीव्रता 5.0 और गहराई करीब 14 किलोमीटर थी. इसके करीब दो घंटे बाद दोपहर 3 बजकर 42 मिनट 30 सेकंड पर दूसरा भूकंप आया. इसकी तीव्रता 3.4 और गहराई करीब 10 किलोमीटर थी. दूसरे भूकंप का केंद्र 31.472 डिग्री उत्तर और 80.356 डिग्री पूर्व में था. दोनों भूकंप के केंद्र में करीब डेढ़ किलोमीटर का ही अंतर था. इसलिए दूसरे झटके को पहले भूकंप के बाद आया आफ्टरशॉक यानी बाद का झटका माना जा रहा है.
कैलाश मानसरोवर से कितनी दूर है भूकंप का केंद्र?
भूकंप का केंद्र तिब्बत के नगारी इलाके में जांदा के आसपास बताया जा रहा है. यह जगह कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील से करीब 100 किलोमीटर दूर है. कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन परंपरा में बेहद पवित्र माने जाते हैं. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां यात्रा पर जाते हैं. फिलहाल, कैलाश मानसरोवर यात्रा या यात्रा मार्ग पर भूकंप से किसी असर की कोई खबर नहीं है.
नेपाल वाले भूकंप से इसका कोई लेना-देना नहीं
कुछ जगह इस भूकंप को नेपाल के पास हुई हाल की घटनाओं से जोड़कर बताया जा रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है. यह भूकंप पश्चिमी तिब्बत में काफी दूर आया है. इसका इलाका लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के करीब पड़ता है. इसे नेपाल वाली घटना से जोड़ना सही नहीं होगा.
तिब्बत में भूकंप क्यों आते हैं?
भारत की जमीन वाली प्लेट लगातार उत्तर की तरफ बढ़ रही है. यह प्लेट तिब्बत की प्लेट से टकरा रही है. इसी टक्कर की वजह से हिमालय बना और आज भी इस पूरे इलाके में जमीन के अंदर दबाव बना रहता है. तिब्बत के कुछ हिस्सों में जमीन दबने के बजाय खिंचती भी है. इस खिंचाव की वजह से जमीन के अंदर दरारें बनती हैं और भूकंप आते हैं. नगारी इलाके में भी समय-समय पर पांच या उससे ज्यादा तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं.
कम गहराई वाला भूकंप ज्यादा तेज क्यों लगता है?
भूकंप जितनी कम गहराई पर आता है, उसकी ऊर्जा को जमीन की सतह तक पहुंचने में उतनी ही कम दूरी तय करनी पड़ती है, इसलिए कम गहराई वाले भूकंप के झटके ज्यादा तेज महसूस हो सकते हैं. दोनों भूकंप 10 से 14 किलोमीटर की गहराई पर थे, इसलिए इन्हें कम गहराई वाला भूकंप माना जाता है.
5.0 और 3.4 तीव्रता में कितना बड़ा अंतर?
भूकंप की तीव्रता का पैमाना सीधा नहीं बढ़ता है. तीव्रता में एक अंक का अंतर होने पर ऊर्जा में करीब 32 गुना का फर्क होता है. इसलिए 5.0 तीव्रता वाला भूकंप 3.4 वाले भूकंप से काफी ज्यादा ताकतवर था. फिर भी इस घटना में नुकसान की खबर नहीं है. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि भूकंप का केंद्र बहुत कम आबादी वाले इलाके में था.
नगारी में बहुत कम है आबादी?
नगारी का इलाका बहुत बड़ा है, लेकिन यहां रहने वाले लोगों की संख्या बेहद कम है यानी कई जगहों पर बहुत बड़े इलाके में भी आबादी काफी कम है. ऐसे में भूकंप आने पर नुकसान की आशंका घनी आबादी वाले शहरों के मुकाबले कम रहती है.
2025 में तिब्बत में आया था बड़ा भूकंप
7 जनवरी, 2025 को तिब्बत के डिंगरी इलाके में 7.1 तीव्रता का बड़ा भूकंप आया था. इसमें कम से कम 126 लोगों की मौत हुई थी और 3,500 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा था. इस भूकंप के झटके नेपाल, बिहार और दिल्ली-NCR तक महसूस किए गए थे. इसका केंद्र माउंट एवरेस्ट से करीब 80 किलोमीटर उत्तर में था.
भारत के लिए क्या मायने?
भूकंप के झटके लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड या दिल्ली-NCR में महसूस किए जाने की फिलहाल कोई खबर नहीं है. हालांकि, पूरा हिमालयी इलाका भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और पूर्वोत्तर के कई राज्य भूकंप के ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में आते हैं.
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