सिंधु जल संधि पर भारत की सख्ती के बाद पाकिस्तान दुनियाभर के मंचों से गिड़गड़ा रहा है. आतंकवाद को लेकर चुप रहने वाले शहबाज शरीफ को जब लगा कि पाकिस्तान में पानी का संकट छा सकता है तो उन्होंने किर्गिस्तान में SCO के मंच से इस मुद्द को उठाया. शहबाज ने पानी को ‘Lifeblood of region’ यानी कि क्षेत्र की जीवनरेखा बताया. पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि पानी हमारे क्षेत्र की जीवन-रेखा है और इसका इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए.
आतंकवाद को लेकर शहबाज का बयान
शहबाज शरीफ ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने SCO समिट में सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया. हर मोड़ पर आतंकवाद का साथ देने वाले पाकिस्तान सरकार की बोली SCO मंच पर अचानक बदल गई. बलूचिस्तान और पीओके में PAK आर्मी सरेआम लोगों पर गोली और बारूद बरसा रही है. दूसरी ओर शहबाज शरीफ दुनिया के पावरफुल मंच पर कहते हैं कि आतंकवाद के हर रूप की निंदा की जानी चाहिए, लेकिन वो खुद अपनी सेना को रोकने की हिम्मत नहीं दिखा पाते हैं.
शहबाज शरीफ ने कहा, ‘बिश्केक में SCO के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की बैठक को संबोधित करना मेरे लिए सम्मान की बात थी. पाकिस्तान 2027 में एससीओ की अध्यक्षता करने जा रहा है. पिछले 25 सालों में SCO क्षेत्रीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है.’ उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद की हर तरह से निंदा की जानी चाहिए.’
पानी के लिए गिड़गिड़ाया पाकिस्तान
पाकिस्तानी पीएम ने भारत का नाम लिए बिना सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा, ‘पानी हमारे क्षेत्र की जीवन-रेखा है. इसका इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए. साझा समझौते के तहत इसका सम्मान किया जाना चाहिए.’ शहबाज शरीफ का ये बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले 31 अगस्त 2026 को भारत ने एक बार फिर आईडब्ल्यूटी यानी सिंधु जल संधि को लेकर तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (सीओए) के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया.
भारत ने ‘सीओए’ के फैसले को किया खारिज
विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा, ‘गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि के तहत अंतरिम उपायों और संधि की स्थिति के बारे में अपना फैसला सुनाया है. यह तथाकथित कोर्ट विश्व बैंक के संधि की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन करते हुए बनाया गया था. भारत इसके तथाकथित फैसले को पूरी तरह से खारिज करता है, ठीक वैसे ही जैसे उसने इस गैर-कानूनी संस्था के पहले के सभी फैसलों को सख्ती से खारिज किया है.’

