नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव का काम लगातार जारी है. नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में सर्च, रेस्क्यू और राहत के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 1,176 लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला गया है. इस अभियान में नेपाली सेना के 6 और निजी कंपनियों के 9 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं. कुल 15 हेलीकॉप्टर प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम कर रहे हैं.
469 लोगों के शव बरामद

बाढ़ और इससे जुड़े हादसों में अब तक 469 लोगों के शव बरामद किए गए हैं. इनमें चितवन में सबसे ज्यादा 137 शव मिले हैं. नवलपरासी ईस्ट में 87, धादिंग में 33, गोरखा में 32, तनहुं में 28, नुवाकोट में 28, नवलपरासी वेस्ट में 27 और रसुवा में 17 शव बरामद हुए हैं. रिपोर्ट में कुल 977 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है. लापता लोगों में नेपाल पुलिस, नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, सीमा शुल्क और आव्रजन विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं.
13 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी लगाए गए
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सर्च और रेस्क्यू के लिए कुल 13,295 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है. इनमें नेपाल पुलिस के 7,250, नेपाली सेना के 4,200 और सशस्त्र पुलिस बल के 1,845 जवान शामिल हैं. राहत और बचाव के साथ घायलों के इलाज पर भी ध्यान दिया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार कुल 130 घायल लोगों का इलाज हुआ है. इनमें 67 लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि 48 लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है. 14 लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजा गया है. एक व्यक्ति को अस्पताल लाए जाने पर मृत घोषित किया गया.
आगे भी बाढ़ का खतरा
रिपोर्ट में आने वाले दिनों में भी खतरा बने रहने की बात कही गई है. सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती अध्ययन में पता चला है कि रसुवागढ़ी सीमा से करीब 18 किलोमीटर ऊपर एक जगह नदी का रास्ता बंद हो गया है. इससे करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पानी जमा होकर झील बन गई है. अधिकारियों को आशंका है कि आसपास के इलाकों में ऐसी और छोटी झीलें बन सकती हैं. अगर जमा पानी अचानक निकलता है तो नीचे के इलाकों में फिर तेज बाढ़ आ सकती है. इसलिए प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई है.
सड़कें खोलने का काम जारी
बाढ़ के कारण कई जगह सड़कें बंद हो गई थीं. देवीघाट में सड़क से मलबा हटाने का काम पूरा कर लिया गया है. वहीं गलछी-बिदुर-त्रिशूली और बैरेनी-मुग्लिन सड़क पर रास्ता साफ करने के लिए भारी मशीनें लगाई गई हैं. धुंचे-ग्रांग, बिदुर-त्रिशूली-धुंगे और बैरेनी-मुग्लिन सेक्शन में भी सड़क खोलने का काम चल रहा है. अलग-अलग जगहों पर एक्सकेवेटर, व्हील लोडर, टिपर और दूसरे भारी उपकरण लगाए गए हैं.
नेपाल सरकार ने ढाई करोड़ रुपये की राहत भेजी
नेपाल सरकार ने प्रभावित जिलों के लिए नकद राहत भी जारी की है. रसुवा को 1 करोड़ नेपाली रुपये, नुवाकोट को 1 करोड़ रुपये और धादिंग को 50 लाख रुपये दिए गए हैं. इस तरह तीनों जिलों के लिए कुल 2 करोड़ 50 लाख नेपाली रुपये की राहत भेजी गई है. काठमांडू से प्रभावित इलाकों में तंबू, कंबल, स्लीपिंग बैग, मच्छरदानी, सोलर लैंप, जनरेटर, पानी और दूसरी जरूरी राहत सामग्री भी भेजी जा रही है. प्रभावित परिवारों तक इन सामानों को पहुंचाने का काम जारी है.
पेट्रोल और डीजल की सप्लाई भी जारी
नुवाकोट में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी कदम उठाए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार वहां करीब 23 हजार लीटर डीजल और 6 हजार लीटर पेट्रोल उपलब्ध था. इसके अलावा नए सिरे से 18 हजार लीटर डीजल और 18 हजार लीटर पेट्रोल भेजा गया है. विमानन ईंधन भी उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि हेलीकॉप्टर से राहत और बचाव अभियान जारी रखा जा सके.
राहत और बचाव के लिए बनाई गईं 12 टीमें
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव के काम को बेहतर तरीके से चलाने के लिए 12 अलग-अलग सेक्टर की आपातकालीन टीमें बनाई हैं. इनमें सर्च और रेस्क्यू, स्वास्थ्य सेवा, सड़क और परिवहन, बिजली और संचार बहाली, राहत सामग्री, शव प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय मदद और लापता लोगों की जानकारी जुटाने वाली टीमें शामिल हैं. जिन लोगों का अपने परिवार से संपर्क टूट गया है, उन्हें SETU ऐप के जरिए ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है. प्रशासन प्रभावित लोगों, लापता लोगों और सुरक्षित निकाले गए नागरिकों की जानकारी जुटाने पर भी काम कर रहा है.
भोटेकोशी बाढ़ की वजह क्या बताई गई?
NDRRMA की रिपोर्ट के मुताबिक 26 अगस्त 2026 को नेपाल-चीन सीमा के पास ल्हेंडे खोला के उत्तरी इलाके में करीब एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा ढह गया. इससे जमीन में तेज हलचल हुई और करीब 5.2 तीव्रता के बराबर भूकंपीय संकेत दर्ज हुआ. इसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के रास्ते में अचानक तेज बाढ़ आई. इस घटना ने आसपास के कई इलाकों में बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया और इसके बाद सर्च, रेस्क्यू और राहत अभियान शुरू किया गया. प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता अब लापता लोगों की तलाश और आगे आने वाली बाढ़ के खतरे को कम करना है. प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर, सुरक्षाकर्मी और भारी मशीनें लगातार काम कर रही हैं.

