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भारत के AMCA इंजन के लिए भिड़ गए इंग्लैंड-फ्रांस, रॉल्स रॉयस ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का किया वादा

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दुनिया में बेहद कम देश हैं जो लड़ाकू विमानों के एविएशन इंजन बना सकते हैं. उसमें भी स्टील्थ फाइटर जेट यानी फिफ्थ जेनरेशन एयरक्राफ्ट का इंजन और भी मुश्किल है. ऐसे में भारतीय वायुसेना के लिए जो स्टील्थ फाइटर जेट बनाया जाना है यानी एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमका), उसके लिए एविएशन इंजन बनाना भी एक बड़ी चुनौती है. 

ऐसे में दुनिया के कई देश हैं, जिन्होंने भारत की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है. एविएशन इंजन की दौड़ में कई खिलाड़ी हैं. इसी कारण एमका इंजन को लेकर इंग्लैंड और फ्रांस आमने सामने आ गए हैं क्योंकि भले विश्वयुद्ध के दौरान ये दोनों देश एक साथ मिलकर जर्मनी से लड़े थे, लेकिन इनकी दुश्मनी और अदावत कई सदियों पुरानी है. 

जीई कंपनी से नहीं मिल पा रहे इंजन
इस पूरे खेल में अमेरिका तीसरा बड़ा खिलाड़ी है. करीब 3 साल पहले 2023 में अमेरिकी की GE एयरोस्पेस कंपनी से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने F-414 इंजन के लिए एग्रीमेंट किया था. 3 साल बाद भी ये डील आगे नहीं बढ़ी है. इसका एक बड़ा कारण ये है कि जीई कंपनी ने अभी तक एफ-404 इंजन की सप्लाई में बेहद देरी कर दी है. 

जीई कंपनी को एलसीए-तेजस के उन्नत वर्जन एलसीए-मार्क1ए के लिए 99 इंजन देने थे लेकिन पिछले 2 सालों में महज 7 इंजन मिल पाए हैं. ऐसे में इस बात की संभावना कम लगती है कि अमेरिका अपना वादा पूरा कर पाएगा. अमेरिका को पहले 404 इंजन की सप्लाई सुधारनी होगी, तभी भारत 414 के लिए आगे बढ़ सकता है. ये 414 इंजन भी भारत, एलसीए तेजस के मार्क-2 वर्जन और एमका के प्रोटो वर्जन या फिर शुरूआती खेप के लिए खरीदना चाहता था. यही वजह है कि भारत ने इंग्लैंड और फ्रांस की तरफ रुख किया है.

2034 तक बनकर तैयार होगा एमका इंजन 
रॉल्स रॉयस और रिलांयस की इस डील पर एबीपी लाइव ने इंग्लैंड के उच्च अधिकारियों से बात की. उनके मुताबिक 2034 तक एमका का इंजन बनकर तैयार हो जाएगा. अब अगर 2034 तक इंजन बनेगा, तब आप खुद समझ सकते हैं कि भारत का स्टील्थ फाइटर जेट कब तक बनकर तैयार होगा. हालांकि, फ्रांस ने एमका इंजन की डेटलाइन अभी जारी नहीं की है. माना जा रहा है कि 2037 तक डीआरडीओ और साफरान का इंजन बनकर तैयार होगा. ये तब है जब चीन के पास इस वक्त 2-2 स्टील्थ फाइटर जेट हैं और पाकिस्तान को भी जल्द 2 फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट मिलने जा रहे हैं. एक चीन से और दूसरा तुर्किये से.

रॉल्स रॉयस ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का किया वादा  
अमेरिका के पास दो-दो स्टील्थ फाइटर जेट हैं- एफ-35 और एफ-22. ऐसे में अमेरिका के पास पूरी तरह से एविएशन इंजन बनाने की एक्सपर्टीज है. इंग्लैंड की रॉल्स रॉयस भी अमेरिका के एफ-35 फाइटर जेट के इंजन बनाने में जीई कंपनी की मदद करती है. रॉल्स रॉयस ने रिलायंस कंपनी को पूरी तरह से एविएशन इंजन बनाने की टेक्नोलॉजी यानी 100% ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी का वादा किया है. ये 120KN किलो न्यूटन की पावर का इंजन होगा, जो किसी भी स्टील्थ फाइटर जेट के लिए जरूरी होता है. इंजन बनने के बाद संभव है कि भारत और इंग्लैंड की सरकारें एक साझा एग्रीमेंट कर लें. जिसे हमे Inter Governmental Agreement कहते हैं. 

फ्रांस की साफरान के पास अभी फिलहाल ऐसा कोई अनुभव नहीं दिखाई पड़ रहा है. बता दें कि अभी तक साफरान और डीआरडीओ की जीटीआरई लैब में एग्रीमेंट नहीं हुआ है लेकिन फ्रांस ने रेस में हिस्सा लेने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है. जल्द ही ये मुद्दा रक्षा मंत्रालय की तरफ से प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी-सीसीएस में पहुंचने की उम्मीद है. 

यही वजह है कि रूस और अमेरिका जैसे देशों ने भारत को सीधे अपने-अपने स्टील्थ फाइटर जेट देने की पेशकश की है. अमेरिका ने अपना एफ-35 देने का ऑफर किया है और रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने तो अपने सु-57 लड़ाकू विमान को मेक इन इंडिया के तहत बनाने की पेशकश की है. 

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