
- चीन ने नेपाल सीमा पर भूस्खलन झील टूटने का बड़ा खतरा बताया।
- बैरियर झील में भारी जल जमाव, बांध टूटने का अत्यधिक खतरा बढ़ा।
- नेपाल ने अपनी नदियों में ब्लॉकेज से और बाढ़ की चेतावनी दी।
- 26 अगस्त की भीषण बाढ़ ग्लेशियर टूटने से आई थी।
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बुधवार (26 अगस्त, 2026) को आई भीषण बाढ़ से मची तबाही के बाद अब एक और बड़ा खतरा दस्तक दे रहा है. चीन ने चेतावनी दी है कि नेपाल और तिब्बत की सीमा के पास हाल ही में हुए भूस्खलन के बाद बनी एक झील के बांध के टूटने का बहुत ज्यादा खतरा है और इससे नीचे की तरफ आने वाले इलाकों में एक और भीषण बाढ़ आ सकती है.
चीन की तरफ से यह चेतावनी बुधवार (26 अगस्त, 2026) को इसी इलाके में आई जानलेवा बाढ़ के बाद दी गई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बाढ़ पहाड़ के एक ग्लेशियर के नदी में गिरने की वजह से आई थी.
चीन ने अधिकारियों ने क्या दी जानकारी?
चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर चैनल सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार (28 अगस्त, 2026) तक इस बैरियर झील में अनुमानित 2.5 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है. बता दें कि एक बैरियर झील वह वॉटर बॉडी होता है, जो नदी में मलबे के गिरने की वजह से बने बांध से तैयार होता है. अधिकारियों ने कहा कि गुरुवार (27 अगस्त, 2026) से लेकर हफ्ते के अंत के बीच करीब 3 मिलियन क्यूबिक मीटर यानी करीब 30 लाख घन मीटर पानी के झील में पहुंचने की उम्मीद है. इससे इसके बांध के टूटने का बहुत ज्यादा खतरा पैदा हो गया है.
चीनी सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस इलाके में भारी बारिश होने की भी संभावना है. चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने बताया कि छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम पर बनी यह बैरियर झील गुरुवार (27 अगस्त, 2026) को ही उफनने लगी थी.
नेपाल के अधिकारियों ने भी जारी की चेतावनी
रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तरफ नेपाल के अधिकारियों ने भी भोते कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारों पर ब्लॉकेज पैदा होने के कारण आगे और बाढ़ आने के खतरे की चेतावनी दी है. नेपाल के अधिकारियों ने अगले आदेश तक लोगों को नदियों से दूर रहने की सलाह दी है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि बुधवार (26 अगस्त) को आई भीषण बाढ़ जरूर लैंगटांग लिरुंग के पास ग्लेशियर के एक हिस्से से टूटकर नीचे नदी में गिरने की वजह से आई थी. ग्लेशियर के हिस्से के नदी में गिरने से पानी और मलबे का एक बड़ा उफान पैदा हुआ, जो तेज रफ्तार से निचले इलाकों की ओर बह गया. इसी वजह से इतनी भारी तबाही मची, जिसमें अब तक सैकड़ों लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और सैकड़ों अभी भी लापता हैं.
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