नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ अपने भीतर पूरा का पूरा शहर बहाकर ले गई. बाढ़ के बाद अब राहत बचाव का काम जोरों शोरों से चल तो रहा है, लेकिन कई लोग अभी भी अपनों की तलाश में उम्मीद लगाए इंतजार कर रहे हैं. अभी भले ही ऐसा लग रहा हो कि बाढ़ अचानक आई, लेकिन दो महीने पहले दो रिपोर्टों में इस आपदा की चेतावनी दे दी गई थी.
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की रिपोर्ट में अलर्ट किया गया था कि हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र में ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे अचानक बाढ़ जैसी आपदाओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है. मार्च 2026 में जारी की गई रिपोर्ट में पाया गया कि इस क्षेत्र में साल 2000 के बाद से ग्लेशियरों के पिघलने की स्पीड कई गुना बढ़ गई है, जिसमें सबसे छोटे और सबसे कमजोर ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं और ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़ जैसे खतरों को बढ़ा रहे हैं.
साल 1975 से अब तक ग्लेशियरों की बर्फ की मोटाई 27 मीटर तक घट चुकी है. छोटे और नाजुक ग्लेशियर सबसे तेजी से खत्म हो रहे हैं. ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है, जिसमें अभी तक 475 लोगों की मौत पुष्टि और लगभग 1,000 लोग लापता हैं. इस भीषण आपदा के बाद अब लोगों ध्यान पुरानी चेतावनियों पर फिर से गया है. विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह आपदा ऊंचाई वाले स्थान से बर्फ और चट्टानों के खिसकने के कारण हुई थी.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक,ICIMOD के विशेषज्ञ मोहम्मद फारूक अजाम ने इस घटना में ग्लेशियर के नीचे का आधार-चट्टान टूटकर अलग हो गया, जिससे भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानें तेजी से बहकर घाटी में आ गिरी. उन्होंने कहा, ‘अचानक आई बाढ़ के साथ नीचे आया यह मलबा अब नदी के संगम स्थल पर भी जमा हो रहा है, जहां फिलहाल अस्थायी बांध बन गया है. इस बांध के कारण पानी जमा हो रहा है और अनुमान है कि अगले तीन दिनों में इस अस्थायी जलाशय या झील में और अधिक पानी जमा होगा. इसलिए इस घाटी में दोबारा अचानक बाढ़ आने की आशंका है.’
फारूक अजाम ने कहा कि यह भी हो सकता है कि इस झील के किनारे धीरे-धीरे टूटें और पानी अचानक बाढ़ लाए बिना निकल जाए. फरवरी 2021 में उत्तराखंड के चमोली में आई अचानक बाढ़ जैसी स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘ये वैसी ही स्थिति है, जैसी चमोली में हुई थी, जब मलबे का एक बड़ा हिस्सा नीचे आया और कुछ समय के लिए ऋषिगंगा नदी का बहाव रोक दिया था.’ नेपाल ने अचानक आई बाढ़ से पहले से प्रभावित इलाके में पानी का स्तर बढ़ने के बाद बाढ़ की नयी चेतावनी जारी की है. नेपाल ने कहा है कि उसी जगह पर पानी का स्तर बढ़ने से इलाके में एक और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.
HKH ग्लेशियर आउटलुक 2026 की रिपोर्ट में 38 ग्लेशियरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि साल 2000 के बाद से ग्लेशियरों के पिघलने की गति दोगुनी हो गई है. हालांकि, ICIMOD ने ये भी बताया कि ग्लेशियरों की निगरानी में कई बड़ी कमियां हैं. 38 में से केवल 7 ग्लेशियर ही वैश्विक निगरानी मानकों पर खरे उतरते हैं. काराकोरम, सिक्किम, ज़ांस्कर और भूटान जैसे बड़े ग्लेशियर क्षेत्रों में निगरानी की भारी कमी है.
विशेषज्ञ मोहम्मद फारूक अजाम ने कहा, ‘हम एक अधूरा नक्शा लेकर तेजी से बदलते भविष्य का रास्ता ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. अगर हम निगरानी तंत्र को बढ़ाएंगे नहीं और सही तरीके नहीं अपनाएंगे तो पानी के बहाव में बदलाव और बर्फ से जुड़े खतरों का पता तब तक नहीं चल पाएगा, जब तक कि गंभीर तबाही न आ जाए.’ रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी हेंगडुआन शान पहाड़ियों में ग्लेशियरों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है, जहां पिछले तीन देशों में 33 फीसदी तक बर्फ खत्म हो चुकी है. सबसे बड़ा नुकसान सिंधु (Indus), गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी घाटियों में हुआ है, जहां पूरे क्षेत्र के 74 फीसदी से अधिक ग्लेशियर मौजूद हैं.


