अमेरिका के कई हिस्सों में गुरुवार (27 अगस्त 2026) रात को चांद का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा. यहां आंशिक चंद्रग्रहण (Partial Lunar Eclipse) दिखाई देगा, जिसे अमेरिका में सबसे बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक माना जा रहा है. अमेरिकी समय के अनुसार वहां रात 10:34 बजे से आंशिक चंद्रग्रहण की शुरुआत होगी. रात 11:13 बजे यह ग्रहण अपने चरम पर होगा. तब चंद्रमा का 96 फीसदी हिस्सा धरती की छाया के भीतर आ जाएगा, जिसे अम्ब्रा कहा जाता है. इस दौरान सूर्य की सीधी रोशनी पूरी तरह से रुक जाएगी.
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह खूबसूरत नजारा पूरे अमेरिका (अलास्का और उत्तर-पश्चिमी कनाडा को छोड़कर), पश्चिमी यूरोप और पश्चिमी अफ्रीका से साफ देखा जा सकेगा. जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की बाहरी छाया से गुजरेगा तो पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर पहुंचने वाली सूर्य की किरणों के कारण पर चांद पर तांबे जैसा लाल रंग (Blood Moon Effect) छा जाएगा.
नासा (NASA) के अनुसार, यह चंद्रग्रहण एक विशेष खगोलीय घटना का चक्र है, जो हर 18 साल, 11 दिन और 8 घंटे के अंतराल पर दोहराया जाता है. इस चक्र का पिछला चंद्रग्रहण 16 अगस्त 2008 को लगा था, जबकि अब अगला ऐसा ग्रहण 7 सितंबर 2044 को देखने को मिलेगा. पूर्ण सूर्यग्रहण बहुत कम देखने को मिलता है, जबकि चंद्रग्रहण को दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में रहने वाले लोग अक्सर देखते हैं. दुनिया में जहां भी रात हो रही होती है, वहां के लोग औसतन 2.5 साल में एक बार चंद्रग्रहण आसानी से देख सकते हैं.
ब्लड मून के पीछे की साइंस
नासा के अनुसार, जिस वैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण हमें दिन में आसमान नीला और शाम को सूरज ढलते समय लाल दिखता है, वही प्रक्रिया चंद्रग्रहण के समय चांद के रेड और ऑरेंज दिखे की वजह है. सूरज से आने वाली रोशनी हमें भले ही सफेद दिखाई देती है, लेकिन असल में इसमें सतरंगी रंग शामिल होते हैं. इन रंगों की अपनी विशेषताएं होती हैं. जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरता है, तो नीले रंग का प्रकाश आसानी से चारों तरफ बिखर जाता है. इसके विपरीत, लाल और नारंगी रंग की रोशनी बिना अधिक बिखरे वायुमंडल के पार सीधी ट्रैवल करती है.
साफ मौसम में जब सूरज सिर पर होता है तो हवा में बिखरी हुई नीली रोशनी ही पूरे आसमान को नीला दिखाती है. वहीं, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जब सूरज हॉराइजन होता है, तब धूप को जमीन पर मौजूद हमारी आंखों तक पहुंचने के लिए वायुमंडल से होकर लंबा और कम एंगल वाला रास्ता तय करना पड़ता है. इस दौरान नीली रोशनी रास्ते में ही दूर बिखर जाती है और हमारी आंखों तक केवल पीले से लेकर लाल रंग की रोशनी ही पहुंच पाती है.
यही प्रक्रिया चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा के साथ होती है. इस दौरान जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब सूरज की रोशनी सीधे चांद तक नहीं पहुंच पाती, लेकिन धरती के किनारों से होकर गुजरने वाली थोड़ी सी धूप हमारे वायुमंडल की मोटी परत से छनकर चांद की सतह पर पड़ती है. यानि की उस समय पूरी दुनिया में जहां भी सूर्योदय और सूर्यास्त हो रहे होते हैं उन सबकी मिली-जुली लालिमा सीधे चंद्रमा पर प्रोजेक्ट हो जाती है और इसी वजह से चाँद लाल या ऑरेंज कलर का चमकीला दिखाई देने लगता है.


