भारत में पेट्रोल और डीजल के बड़े खरीदारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में जो रुकावटें आई थीं, उसे देखते हुए भारत सरकार ने इसी महीने ईंधन की बिक्री पर कुछ सख्त पाबंदियां लागू की थीं। अब स्थिति का आकलन करने के बाद सरकार ने सोमवार को एक आदेश जारी कर इन प्रतिबंधों को खत्म करने का एलान कर दिया है।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर क्या नया आदेश जारी किया है?
सोमवार को सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में साफ किया गया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर हाल ही में लगाए गए प्रतिबंध हटा लिए गए हैं। इस सरकारी आदेश के मुताबिक, ईंधन की खरीद और बिक्री को लेकर लागू की गई यह रोक 1 जुलाई से पूरी तरह से समाप्त कर दी जाएगी। इसका सीधा सा अर्थ है कि आने वाली 1 जुलाई से पेट्रोल पंपों और रिटेल स्टेशनों पर पहले की तरह ही सामान्य रूप से ईंधन उपलब्ध होने लगेगा।
ईंधन की बिक्री पर अचानक क्यों लगानी पड़ी थी पाबंदी?
दरअसल, यह पूरा मामला वैश्विक हालातों से जुड़ा हुआ है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण दुनिया भर की आपूर्ति शृंखलाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। विदेशी बाजार में सप्लाई चेन बाधित होने की वजह से भारत के स्थानीय बाजारों में भी ईंधन की आपूर्ति को लेकर दबाव बन गया था। सरकार को यह आशंका थी कि अगर स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत हो सकती है। इसी घरेलू संकट को टालने के लिए सरकार ने इसी महीने ये प्रतिबंध लगाए थे।
इन प्रतिबंधों के दौरान किन नियमों का पालन करना पड़ रहा था?
सरकार की ओर से लगाई गई इस पाबंदी का सबसे ज्यादा असर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए ईंधन खरीदने वालों पर पड़ा था। प्रतिबंधों के तहत, कमर्शियल खरीदारों को सीधे रिटेल स्टेशनों (पेट्रोल पंपों) से पेट्रोल और डीजल खरीदने से पूरी तरह रोक दिया गया था। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर ईंधन की कमी को रोकने के लिए सरकार ने डीजल की रोजाना खरीद पर भी एक सीमा तय कर दी थी। यानी कोई भी व्यावसायिक संस्था एक दिन में एक तय मात्रा से अधिक डीजल नहीं खरीद सकती थी।
1 जुलाई से इस फैसले का क्या असर दिखेगा?
सरकार के इस फैसले से यह संकेत मिलता है कि ईंधन की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं अब नियंत्रण में हैं। 1 जुलाई से व्यावसायिक खरीदारों के लिए रिटेल स्टेशनों से पेट्रोल और डीजल खरीदने के रास्ते फिर से खुल जाएंगे और डीजल खरीद की दैनिक सीमा भी खत्म हो जाएगी। इससे कमर्शियल ट्रांसपोर्टरों और उद्योगों को अपनी जरूरत के हिसाब से ईंधन जुटाने में मदद मिलेगी, जिससे लॉजिस्टिक और व्यावसायिक गतिविधियां पहले की तरह सुचारू रूप से चल सकेंगी।

