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दिल्ली में अब केवल अधिकतम तापमान ही गर्मी की गंभीरता तय नहीं करेगा। आने वाले समय में हीट इंडेक्स (फील्स लाइक टेम्परेचर) ही लोगों के लिए असली खतरे का पैमाना बनता जा रहा है। इसकी वजह मई और जून के दौरान हवा में लगातार बढ़ने वाली आर्द्रता है, जो वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी का एहसास कराती है। दिल्ली में इसका असर पिछले कुछ साल में लगातार देखने को मिला। दिल्ली में आमतौर पर जून और जुलाई के दौरान नमी बढ़ जाती है, जिससे हीट इंडेक्स या महसूस होने वाला तापमान बढ़ जाता है। साथ ही, इस सीजन दिल्ली में लू के तीन दौर अप्रैल, मई और जून में देखे गए।

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धूप से बचने का प्रयास करता युवा
– फोटो : PTI
5 जुलाई को महसूस हुई 54 डिग्री सेल्सियस
मौसम विभाग के आकंड़ों पर नजर डालें तो, 5 जुलाई 2025 को वास्तविक तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस था, लेकिन लोगों ने 54 डिग्री सेल्सियस जैसी गर्मी महसूस की। इसी तरह 22 मई 2024 को तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि हीट इंडेक्स 55.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इस साल भी जून के अंतिम दिनों में यही स्थिति देखने को मिल रही है। पिछले तीन दिन से ‘फील्स लाइक’ तापमान लगातार 50 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। 27 जून को अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि हीट इंडेक्स 51.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 28 जून को वास्तविक तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस था, लेकिन महसूस होने वाला तापमान 50.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

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दिल्ली में गर्मी से परेशान दोपहिया वाहन चालक
– फोटो : PTI
थर्मामीटर से परे…गर्मी को समझने के चार पैमाने
ड्राई बल्ब टेम्परेचर
-थर्मामीटर से मापा गया हवा का वास्तविक तापमान।
-सिर्फ हवा की गर्मी या ठंडक बताता है, इसमें नमी शामिल नहीं होती।
हीट इंडेक्स
-तापमान और हवा की नमी को मिलाकर तय होने वाला ‘महसूस होने वाला तापमान।
-नमी बढ़ने से पसीना कम सूखता है, इसलिए शरीर ज्यादा गर्मी महसूस करता है और हीट इंडेक्स वास्तविक तापमान से काफी अधिक हो सकता है।
वेट बल्ब टेम्परेचर
-वाष्पीकरण से हवा के पहुंचने वाला न्यूनतम तापमान।
-गीले कपड़े वाले थर्मामीटर से मापा जाता है और बताता है कि शरीर पसीने से खुद को कितना ठंडा रख सकता है। 35 डिग्री इसकी इंसानी सहनशक्ति की ऊपरी सीमा मानी जाती है।
हीटवेव
-जब किसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो।
-भारत में इसके मानक अलग-अलग क्षेत्रों के सामान्य मौसम के अनुसार तय किए जाते हैं।

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धूप से बचने के लिए पुल के नीचे खड़े लोग
– फोटो : अमर उजाला
गर्मी का सेहत पर असर
-डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)
-स्किन की बीमारी
-कमजोर इम्यूनिटी
-मानसिक तनाव
-अधिक सूजन
-बहुत अधिक पसीना आना
-दिल और किडनी जैसे जरूरी अंगों पर अतिरिक्त दबाव
दिल्ली और मैदानी इलाकों के लिए हीटवेव के पैमाने
-अधिकतम तापमान 45 डिग्री या उससे अधिक
-अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 या उससे अधिक हो और कम से कम 40 डिग्री हो
गंभीर हीटवेव
-अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री या उससे अधिक हो
-अधिकतम तापमान 47 डिग्री या उससे ज्यादा हो

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गर्मी से परेशान लोग
– फोटो : PTI
क्या करें
-प्यास न होने पर भी पर्याप्त पानी पिएं
-ओआरएस का इस्तेमाल करें और घर पर बने ड्रिंक्स जैसे नींबू पानी, छाछ, और थोड़ा नमक मिला हुआ फलों का रस पिएं
-मौसम के अनुसार फल और सब्जियां खाएं
-ढीले सूती कपड़े पहनें, हो सके तो हल्के रंग के कपड़े पहनें
-सिर ढकने के लिए छाता, टोपी, स्कार्फ आदि का इस्तेमाल करें
-छाया में रहें
-ठंडे पानी से नहाएं
क्या न करें
-दिन के सबसे गर्म समय में सीधी धूप में जाने से बचें
-नंगे पैर बाहर न निकलें
-ज्यादा चीनी वाले ड्रिंक्स से बचें
-बच्चों या जानवरों को कभी भी खड़ी गाड़ियों में न छोड़ें
-सड़क किनारे स्टॉल का खाना न खाएं


