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Hormuz Crisis: ईरान-अमेरिका में फिर भड़की जंग, होर्मुज पूरी तरह बंद, जानिए अब आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा?

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Indian Economy News: ईरान और अमेरिका के बीच जंग एक बार फिर भड़क गई है. अप्रैल में हुआ नाजुक सीजफायर अब टूटता दिख रहा है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है और साफ कहा है कि जो भी जहाज वहां से गुजरने की कोशिश करेगा उस पर गोली चलाई जाएगी. उधर अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर नए हमले किए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान फौरन समझौते पर साइन नहीं करता तो हमले और तेज होंगे.

इस खबर के बाद गुरुवार सुबह कच्चा तेल करीब 2 डॉलर उछल गया हालांकि बाद में बढ़त थोड़ी कम हुई. ब्रेंट क्रूड 93 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर और अमेरिकी WTI क्रूड 90 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है. बाजार के जानकारों का कहना है कि तेजी इसलिए पूरी नहीं टिकी क्योंकि अभी तक तेल की सप्लाई में असल रुकावट नहीं दिखी है. अमेरिकी सेना का कहना है कि कमर्शियल जहाज अब भी स्ट्रेट से आ-जा रहे हैं.

भारत के लिए यह कितनी बड़ी टेंशन है

समझिए कि होर्मुज भारत के लिए कितना अहम है. भारत का करीब दो-तिहाई कच्चा तेल और आधी LNG इसी रास्ते से आती है यानी अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा महंगाई बढ़ेगी और सरकारी खजाने पर दबाव आएगा.

याद रखिए यह जंग फरवरी के आखिर से चल रही है और इसका असर भारत पहले से झेल रहा है. जंग शुरू होने से पहले ब्रेंट करीब 73 डॉलर पर था जो एक समय 126 डॉलर तक पहुंच गया था अब 93 डॉलर के आसपास है लेकिन यह भी जंग से पहले के मुकाबले करीब 27 फीसदी महंगा है.

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राहत की एक बड़ी खबर भी है

इस बीच भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने सूत्रों ने गुरुवार को बताया है कि उनके पास कम से कम अगस्त तक के लिए पर्याप्त कच्चा तेल मौजूद है यानी अगले दो-ढाई महीने तक देश में तेल की कोई किल्लत नहीं होगी. अबू धाबी की कंपनी ADNOC समेत कुछ सप्लायर एशिया के खरीदारों को तेल भेजने में कामयाब भी हो रहे हैं.

लेकिन सप्लाई की तस्वीर पूरी दुनिया में टाइट होती जा रही है. अमेरिका का क्रूड स्टॉक एक हफ्ते में 72 लाख बैरल घट गया है और जंग शुरू होने के बाद से अब तक 7.9 करोड़ बैरल कम हो चुका है. मई में OPEC देशों का तेल उत्पादन दो दशक से ज्यादा के सबसे निचले स्तर पर आ गया है.

पेट्रोल-डीजल पर क्या होगा

आम आदमी के लिए सीधा सवाल यही है कि पेट्रोल-डीजल का क्या होगा. दिल्ली में पेट्रोल करीब 102 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. सरकार ने मार्च के आखिर में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाई थी, ताकि ग्राहकों पर बोझ कम पड़े फिर भी तेल कंपनियों को रोजाना करीब 750 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है. अगर क्रूड फिर 100 डॉलर के पार गया तो कंपनियों पर दाम बढ़ाने का दबाव और बढ़ेगा.

हवाई किराए और ATF पर असर

जंग का सबसे बड़ा झटका एविएशन सेक्टर को लगा है. ATF यानी हवाई जहाज का ईंधन महंगा होने से एयरलाइंस पहले ही किराए बढ़ा चुकी हैं और कई रूट पर उड़ानें घटा चुकी हैं. सरकार ने जून के पहले हफ्ते में ATF के दाम काबू में रखने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये तक के सपोर्ट पैकेज को मंजूरी दी है ! अगर तनाव और बढ़ा तो खाड़ी देशों की उड़ानों पर फिर असर पड़ सकता है क्योंकि एयरलाइंस को लंबे और महंगे रूट लेने पड़ते हैं.

रुपये और बाजार पर नजर

जंग की वजह से रुपया भी दबाव में है. रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के पार जा चुका है और विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. RBI रुपये को संभालने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेच रहा है ! कमजोर रुपये का मतलब है कि हर बैरल तेल भारत को और महंगा पड़ता है.

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