ओमान के समुद्री तट के नजदीक एक कमर्शियल जहाज पर अमेरिकी नौसेना के हमले और उसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार (13 जून, 2026) को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की. उन्होंने अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीयों की मौत की कड़ी निंदा की, जिस पर अब अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से प्रतिक्रिया दी गई है. मंत्रालय ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सभी कमर्शियल जहाजों को तत्काल अमेरिकी नौसेना के नियमों के सख्ती से पालन करना चाहिए.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रिंसिपल डेप्यूटी प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, ‘अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कल भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत की. दोनों अधिकारियों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हाल ही में घटी घटनाओं पर चर्चा की. इस दौरान विदेश मंत्री रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि इलाके मे शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से तैनात अमेरिकी सेना के आदेशों का सभी कमर्शियल जहाजों को तुरंत पालन करना चाहिए.’
Tommy Pigott, Principal Deputy Spokesperson for the US Department of State, says, “US Secretary of State Marco Rubio spoke yesterday with Indian External Affairs Minister Subrahmanyam Jaishankar. The two officials discussed recent events in the Strait of Hormuz. The Secretary… pic.twitter.com/OvsjGBLh0a
— ANI (@ANI) June 13, 2026
उन्होंने कहा, ‘रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल का अवैध परिवहन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’
अमेरिकी विदेश मंत्री से फोन पर क्या बोले जयशंकर?
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत के दौरान अमेरिकी नौसेना की ओर से किए गए हमले पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि कमर्शियल जहाजों के खिलाफ इस तरह की घातक सैन्य कार्रवाई किसी भी स्थिति में सही नहीं है और ऐसी घटनाओं से वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता है.
अमेरिकी राजनयिक को दूसरी बार किया तलब
इस घटनाक्रम के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में अमेरिकी रायनयिक जेसन मीक्स को दूसरी बार तलब किया. भारत ने कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों को बेहद चिंताजनक करार दिया है और इस मुद्दे को अमेरिका के सामने सख्ती से उठाते हुए भविष्य में ऐसी किसी भी कार्रवाई और घटनाओं को रोकने की मांग की है.


