तमिलनाडु में एआईएडीएमके के तीन बागी विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये तीनों विधायक सी वी शनमुगम और एस पी वेलुमणि के नेतृत्व वाले बागी गुट का हिस्सा थे। सोमवार को इन्होंने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से मुलाकात की और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया।
इस्तीफा हुआ मंजूर
इस्तीफा देने वाले विधायकों में मदुरंतकम से मरगाथम कुमारवेल, धारापुरम से सत्यभामा और पेरुंदुरई से जयकुमार शामिल हैं। इन तीनों ने एआईएडीएमके के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था। सचिवालय में अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद ये तीनों विधायक टीवीके मंत्री आधव अर्जुना से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर ने तीनों विधायकों का इस्तीफा मंजूर कर लिया है।
ऐसी संभावना है कि ये तीनों विधायक मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) में शामिल हो सकते हैं। ये विधायक उन 25 सदस्यों में शामिल थे, जिन्होंने अपनी पार्टी के आदेश का पालन नहीं किया था। इन्होंने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान टीवीके सरकार के समर्थन में अपना वोट दिया था। अब इनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
AIADMK के विधायकों की संख्या 47 से घटकर 44 हुई
इन इस्तीफों के मंजूर होने के साथ ही राज्य की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे। इनमें मदुरंतकम, धारापुरम और पेरुंदुरई के साथ त्रिची ईस्ट सीट भी शामिल है। त्रिची ईस्ट सीट मुख्यमंत्री विजय ने खाली की थी, क्योंकि उन्होंने दो सीटों पर जीत हासिल की थी। इन इस्तीफों के कारण एआईएडीएमके के विधायकों की संख्या 47 से घटकर अब 44 हो गई है।
एआईएडीएमके के भीतर यह विवाद विधानसभा चुनाव के बाद से ही चल रहा है। मुख्यमंत्री विजय के फ्लोर टेस्ट के दौरान पार्टी की आपसी फूट खुलकर सामने आ गई थी। सीवी शनमुगम के नेतृत्व में पार्टी के 25 विधायकों ने अपनी ही पार्टी के आदेश के खिलाफ जाकर टीवीके सरकार को वोट दिया था। टीवीके के पास 119 विधायकों का समर्थन था, लेकिन फ्लोर टेस्ट में उन्हें 144 वोट मिले।
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डीएमके ने टीवीके पर लगाए आरोप
इस घटना के बाद पार्टी महासचिव ईके पलानीस्वामी ने शनमुगम पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया। वहीं शनमुगम ने पलानीस्वामी के नियुक्त किए गए व्हिप के अधिकार पर ही सवाल खड़े कर दिए। वहीं, इस राजनीतिक खींचतान के बीच डीएमके ने टीवीके पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है।
पार्टी को एक और बड़ा झटका तब लगा जब 18 मई को वरिष्ठ नेता एस सेम्मलाई ने भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ईके पलानीस्वामी को अपना इस्तीफा भेजा और पार्टी के मौजूदा हालात पर गहरा दुख जताया। सेम्मलाई ने कहा कि चुनाव के बाद की घटनाओं से उन्हें बहुत मानसिक कष्ट हुआ है और पार्टी के लाखों कार्यकर्ता भी ऐसा ही महसूस कर रहे हैं।


