दिन बुधवार और समय दोपहर के ठीक दो बजे। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित संसद भवन की पहली मंजिल पर समिति कक्ष संख्या-21 में अचानक हलचल तेज हो जाती है। एक-एक कर पाकिस्तान के कुछ वरिष्ठ मंत्री, सांसद और अधिकारी बैठक कक्ष में पहुंचते हैं।
बैठक की अध्यक्षता संघीय मंत्री एवं संसदीय समिति ऑन कश्मीर के अध्यक्ष राणा मुहम्मद कासिम नून करते हैं। यह बैठक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों की मौत और वहां तेजी से बिगड़ते हालात पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी, लेकिन बैठक का एजेंडा कुछ और ही कहानी बयां करता है।
अमर उजाला के पास मौजूद पाकिस्तान सरकार के एक गोपनीय दस्तावेज के अनुसार, संसदीय समिति ऑन कश्मीर की 14वीं बैठक में पीओके में हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौत पर चर्चा का उल्लेख जरूर किया गया, लेकिन बैठक का मुख्य फोकस भारत के खिलाफ नया नैरेटिव तैयार करने, सिंधु जल संधि (इंडस वाटर्स ट्रीटी) पर झूठ का नैरेटिव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मारे गए लोगों की बजाय कश्मीर मुद्दे को फिर से उठाने की साजिश पर रहा।
गोपनीय दस्तावेज के अनुसार, बैठक में विदेशों में सक्रिय कश्मीरी संगठनों और प्रवासी पाकिस्तानियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विभिन्न देशों में पाकिस्तान के दूतावासों के माध्यम से सेमिनार, टॉक शो और अन्य कार्यक्रम आयोजित कर पाकिस्तान के पक्ष में माहौल तैयार किया जाए। साथ ही विदेशी मीडिया और प्रवासी समुदाय के जरिये कश्मीर मुद्दे को नए सिरे से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की रणनीति पर भी विचार किया गया।
गोपनीय दस्तावेज से यह भी संकेत मिलता है कि पीओके में जारी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान सरकार पर बढ़ रहे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ध्यान को दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ने की कोशिश की गई। दस्तावेज में नैरेटिव बिल्डिंग को बैठक की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, पीओके में पिछले 24 घंटों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 18 से अधिक लोगों के मारे जाने की सूचना है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रक्षा मामलों के जानकार सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर गुरिंदर पाल विरदी का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पीओके में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे समय में पाकिस्तान को स्थानीय असंतोष और हिंसा के कारणों पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन यदि बैठक के एजेंडे में भारत के खिलाफ अभियान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया नैरेटिव गढ़ने पर अधिक जोर दिया गया है, तो यह बताता है कि सरकार आंतरिक संकट के बजाय बाहरी मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।

