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‘ड्रैगन’ को झटका देने की तैयारी में भारत, 30 देशों के साथ मिलकर बड़ा गेम करने की तैयारी

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मिनरल्स के मामले में चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत और दुनिया के लगभग 30 देश जल्द ही नई सप्लाई चेन का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. खबरें हैं कि फिलहाल भारत अन्य देशों के साथ इन मुद्दों पर बात कर रहा है. 

ये ऐसे समय में हो रहा है, जब हाल ही में क्वाड देशों की बैठक संपन्न हुई है. इसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के कई नेता शामिल हुए थे. इन देशों ने मिलकर लगभग 20 अरब डॉलर जुटाने का फैसला किया है. इसका इस्तेमाल सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर दुर्लभ मिनरल्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए किया जाएगा.

30 देश मिलकर कर रहे काम
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत और 30 देश इन दुर्लभ मिनरल्स को लेकर एक वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं. दरअसल इन मिनरल्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन और रक्षा उपकरणों में होता है. सूत्रों ने बताया कि बीजिंग की तरफ से एक्सपोर्ट्स नियमों में सख्ती के बाद चीन पर निर्भरता कम करने के लिए नई चेन की योजना पर काम चल रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि भारत के पास रिजर्व है, लेकिन इनमें से ज्यादातर का इस्तेमाल ISRO जैसे खास प्रोजेक्ट्स के लिए होता है. स्मार्टफोन और वाहनों जैसे बड़े बाजार के लिए उद्योगों को अब भी चीन से ही आयात करना पड़ता है. कहा जा रहा है अब अगर नई योजना लागू हो जाती है तो भारतीय उद्योगों को कीमतों के मामले में मनाना बड़ी चुनौती होगी.

ऑस्ट्रेलिया में रिसर्च संस्थानों से साझेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक भारत 30-40 अन्य देशों के साथ मिलकर एक वैकल्पिक बाजार और सप्लाई चेन तैयार करने पर काम कर रहा है, ताकि आयात को लेकर चीन पर निर्भरता कम की जा सके. सूत्रों के मुताबिक भारत कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से बात कर रहा है. हालांकि अभी साफ नहीं हो सका है कि कितने देश इस योजना को लेकर सहमत हैं.

अधिकारी ने बताया कि चुनौती कीमतों की मैचिंग को लेकर है. संवेदनशील तकनीकों को साझा करने से पहले जरूरी है कि बाकी देश हमारे सिस्टम्स पर भरोसा करें. रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय एजेंसियां ऑस्ट्रेलिया में रिसर्च संस्थानों से साझेदारी की योजना बना रही है. 

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