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चीन से लौटते ही ट्रंप का बड़ा फैसला, ताइवान को F-35 और THAAD डिफेंस सिस्टम देगा अमेरिका, बीजिंग ने किया विरोध

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अमेरिका ने साफ कर दिया है कि ताइवान को हथियार बेचने की प्रक्रिया का ईरान के साथ चल रहे युद्ध से कोई संबंध नहीं है. एक विश्वसनीय सूत्र ने कहा कि ताइवान को हथियारों की बिक्री कई सालों से चल रही प्रक्रिया है और इसे ईरान युद्ध से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. हाल ही में अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि ताइवान को हथियारों की सप्लाई में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि अमेरिका को ईरान के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लिए बड़े स्तर पर गोला-बारूद की जरूरत है, लेकिन अब इस दावे को खारिज कर दिया गया है.

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के पास राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सभी रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हथियार, गोला-बारूद और सैन्य स्टॉक मौजूद है. उन्होंने कहा कि हथियार बिक्री की प्रक्रिया में अक्सर कई साल लग जाते हैं और यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.

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ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद कहा था कि वह ताइवान को हथियार बेचने वाले पैकेज पर अभी फैसला नहीं कर पाए हैं. उनके इस बयान के बाद ताइवान में चिंता बढ़ गई थी. ताइवान लंबे समय से अमेरिका से करीब 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज का इंतजार कर रहा है.

चीन लगातार कर रहा विरोध

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिका की तरफ से ताइवान को हथियार बेचने का लगातार विरोध करता रहा है. दूसरी तरफ अमेरिका 1979 के ताइवान रिलेशंस एक्ट के तहत ताइवान को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी हथियार और सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है. अमेरिकी सरकार ने कहा है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

ताइवान ने क्या कहा?

ताइवान सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उसे अमेरिका की तरफ से हथियार बिक्री में किसी तरह की देरी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है.वहीं चीन लगातार अमेरिका पर दबाव बना रहा है कि वह ताइवान को हथियार बेचना बंद करे. ताइवान का कहना है कि उसके भविष्य का फैसला वहां के लोग खुद करेंगे.

अमेरिका-चीन तनाव का बड़ा मुद्दा

ताइवान का मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच तनाव की बड़ी वजह बना हुआ है. एक तरफ अमेरिका ताइवान की सुरक्षा का समर्थन करता है, वहीं दूसरी तरफ चीन इसे अपने अंदरूनी मामले के रूप में देखता है. ईरान युद्ध और चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह मामला और भी संवेदनशील बन गया है. माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही ताइवान हथियार पैकेज पर अंतिम फैसला ले सकते हैं.

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