शेयर बाजार नियामक सेबी ने बुधवार को देश की प्रमुख आभूषण कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) और इसके चेयरमैन व प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ एक कड़ा अंतरिम एकतरफा आदेश जारी किया है। कंपनी पर वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को फर्जी तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और फंड की हेराफेरी का गंभीर आरोप है। हालांकि कंपनी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से साफ इनकार किया है। इस खबर के सामने आते ही कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आइए आसान भाषा में सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है।
सवाल: यह पूरा मामला क्या है और सेबी ने क्या कार्रवाई की है?
जवाब: सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने 109 पेजों का एक अंतरिम आदेश जारी किया है। सेबी की जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनी ने कई वर्षों तक गैर-वास्तविक लेनदेन किए, संदेहास्पद अकाउंटिंग की और प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी संस्थाओं के जरिए कंपनी के फंड को डायवर्ट किया। इन गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के कारण सेबी ने राजेश मेहता को अगले आदेश तक आरईएल की प्रतिभूतियों की खरीद, बिक्री या किसी भी तरह के सौदे करने से रोक (बैन कर) दिया है। सेबी का मानना है कि मेहता ही कंपनी में मुख्य निर्णय लेने वाले व्यक्ति हैं और उनका रोजमर्रा के कामकाज पर पूरा नियंत्रण है।