सोमवार को एक फ़ोन इंटरव्यू के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान को कड़ी सैन्य चेतावनी दी. ओमान, फ़ारस की खाड़ी में अमेरिका का एक अहम रणनीतिक साझेदार है मगर फिर भी ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ओमान, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से समुद्री यातायात को नियंत्रित करने और उसे फिर से खोलने की अमेरिकी कोशिशों में रुकावट डालता है, तो अमेरिका ओमान पर हवाई हमले करेगा.
रिपोर्टर ट्रे यिंगस्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर बताया कि फ़ॉक्स न्यूज़ पर प्रसारित इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा, “अगर ओमान रास्ते में आया तो हम उन पर ज़बरदस्त बमबारी करेंगे.” अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अस्थायी कूटनीतिक ढांचे के तहत बातचीत के लिए तय 60 दिन की समय-सीमा बिना किसी स्थायी समझौते के खत्म हो गई.
फरवरी 2026 के आखिर में ईरान के साथ US-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से ही उस संकरे समुद्री रास्ते पर शिपिंग रूट को लेकर ओमान और ईरान के बीच समानांतर द्विपक्षीय बातचीत चल रही है, जिससे ट्रंप प्रशासन में नाराजगी बढ़ गई है. यह रास्ता काफी हद तक बंद कर दिया गया था.
ट्रंप के इस गुस्से के पीछे क्या वजह है?
ट्रंप के इस गुस्से की मुख्य वजह मस्कट और तेहरान के बीच एक स्वतंत्र राजनयिक पहल है. ओमान, जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दक्षिणी किनारे पर ईरान के उत्तरी तट के ठीक सामने स्थित है, ऊर्जा के इस अहम रास्ते से कमर्शियल ट्रैफिक को फिर से शुरू करने के लिए ईरानी राजनयिकों के साथ समुद्री नेविगेशन प्रोटोकॉल पर बातचीत कर रहा है. इसी बात से अमेरिका नाराज है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ओमान के ख़िलाफ़ यह धमकी तब दी जब वे इस टकराव को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. यह टकराव लगभग छह महीने पहले शुरू हुआ था और तेहरान के साथ बनी कूटनीतिक बातचीत की समय-सीमा भी बिना किसी अंतिम समझौते के खत्म हो गई. लेकिन सोमवार को एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी कहा कि वे समझौता करने की जल्दबाजी में नहीं हैं.
बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने के लिए तय दो महीने की समय-सीमा सोमवार को बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई. ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि युद्ध “जल्द” खत्म हो जाएगा और हाल के महीनों में उन्होंने लंबे समय तक चलने वाले शांति समझौते की संभावना के बारे में भी बात की है, लेकिन ऐसा कोई ठोस नतीजा नहीं निकला.
इसी इंटरव्यू में, ट्रंप ने कहा कि ईरान को आत्मसमर्पण का सफ़ेद झंडा लहराना चाहिए, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि वे तेहरान पर कोई नई समय-सीमा नहीं थोपने वाले हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास कोई समय-सारणी नहीं है. मैं जल्दबाजी में नहीं हूं.”
ट्रंप ने 17 जून को G7 शिखर सम्मेलन के दौरान वर्साय के महल में ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत लड़ाई को कुछ समय के लिए रोका गया था और दोनों पक्षों के लिए प्रतिबंधों में ढील, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य विवादों को शामिल करते हुए एक व्यापक समझौते तक पहुँचने के लिए अधिकतम 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई थी (जिसे केवल आपसी सहमति से ही बढ़ाया जा सकता था).
ट्रंप ने उन चिंताओं को भी खारिज कर दिया कि लगभग छह महीनों की लड़ाई के कारण वाशिंगटन का अपना हथियार भंडार खत्म हो रहा है. उन्होंने फॉक्स न्यूज़ से कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका ने अब तक जो कुछ भी खर्च किया है, वह “बहुत मामूली” है.
ओमान और अमेरिका में कौन अधिक ताकतवर
इसमें कोई शंका नहीं कि अमेरिका की मिलिट्री पावर बहुत अधिक है. अमेरिका का सैन्य बजट काफी है. दोनों देशों की सैन्य ताकत की तुलना करें तो संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ग्लोबल पावर रैंकिंग में 145 देशों 1 नंबर पर आती है. वहीं ओमान की रैंकिंग 86वां है.
दोनों देशों के रक्षा बजट की बात करें तो अमेरिका का रक्षा बजट $800 बिलियन (800 अरब डॉलर) से भी अधिक है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा है. वहीं दूसरी तरफ, वहीं ओमान का सालाना रक्षा बजट लगभग $8.3 बिलियन का है.

सैनिकों के मामले में ओमान कहीं नहीं ठहरता. जहां एक तरफ अमेरिका के पास 13 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक और लगभग 8 लाख रिजर्व सैनिक मौजूद हैं. वहीं ओमान के पास करीब 50,000 सक्रिय सैनिक हैं और आधिकारिक तौर पर शून्य रिजर्व सैनिक दर्ज हैं.
हथियारों और सैन्य उपकरणों में अमेरिका का पलड़ा बेहद भारी
वायु सेना: अमेरिका के पास 13,000 से अधिक सैन्य विमान का विशाल बेड़ा है, जिसमें आधुनिक स्टील्थ फाइटर्स और बॉम्बर्स शामिल हैं. ओमान के पास लगभग 128 विमान हैं, जिनमें मुख्य रूप से F-16 और यूरोफाइटर टाइफून जैसे उन्नत लड़ाकू विमान शामिल हैं.
थल सेना: अमेरिका के पास 4,600 से अधिक M1 अब्राम्स (M1 Abrams) मुख्य युद्धक टैंक हैं जबकि ओमान के पास लगभग 264 मुख्य युद्धक टैंक (जैसे ब्रिटेन निर्मित चैलेंजर 2) हैं.

नौसेना और परमाणु क्षमता: अमेरिका के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर और परमाणु पनडुब्बियों समेत 480 से ज्यादा युद्धपोत हैं, साथ ही लगभग 5,200 परमाणु हथियार (Warheads) का विशाल भंडार है. वहीं ओमान के पास परमाणु हथियार नहीं हैं.
ओमान इन चार मुख्य क्षेत्रों में ज़्यादा असरदार
1. कूटनीतिक तटस्थता और पर्दे के पीछे मध्यस्थता
ओमान को “मध्य पूर्व का स्विट्जरलैंड” कहा जाता है. जहां अमेरिका जैसी महाशक्तियां अक्सर सैन्य दबाव या प्रतिबंधों का सहारा लेती हैं, वहीं ओमान सभी क्षेत्रीय ताकतों—जैसे ईरान, अमेरिका, GCC पड़ोसी और हूथी—के साथ पूरी तरह तटस्थ और भरोसेमंद संबंध बनाए रखता है. ओमान की खास स्थिति उसे पर्दे के पीछे अहम बातचीत कराने, संकट कम करने और कैदियों की ऐसी अदला-बदली कराने में मदद करती है जो विदेशी सैन्य ताकतें नहीं कर सकतीं.
2. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर भौगोलिक दबदबा
ओमान का मुसंडम प्रायद्वीप (Musandam Peninsula) पर सीधा नियंत्रण है. यह इलाका होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी अहम हिस्से (choke point) को बनाता है, जो एक ज़रूरी समुद्री रास्ता है और जिससे दुनिया का लगभग 20% पेट्रोलियम गुज़रता है. हालांकि दुनिया भर की नौसेनाएं आस-पास के पानी में गश्त करती हैं, लेकिन ओमान की भौगोलिक स्थिति उसे लंबी दूरी की सेनाओं के मुकाबले स्थानीय समुद्री रास्तों, तटीय रडार और संकरी जल-संधियों की निगरानी, सुरक्षा और नियंत्रण कहीं ज़्यादा कुशलता से करने की सुविधा देती है.
3. तटीय निगरानी और तस्करी रोकने के लिए खास तरीके
ऊबड़-खाबड़ और कम आबादी वाले तटीय इलाकों में ऑपरेशनल जानकारी बनाए रखने के लिए भारी-भरकम बेड़े के बजाय खास स्थानीय जानकारी की ज़रूरत होती है. ओमान की रॉयल नेवी और ओमान कोस्ट गार्ड हल्के और तेज़ी से मुड़ने वाले तेज़ गश्ती जहाजों (जैसे हरक्यूलिस 26 मीटर के जहाज) का इस्तेमाल करते हैं, जो स्थानीय रडार नेटवर्क और समुद्री गश्ती विमानों से जुड़े होते हैं. इससे ओमान को क्षेत्रीय जल में अवैध नावों (dhow) और तेज़ नावों से होने वाली तस्करी को रोकने में ऑपरेशनल फायदा मिलता है, जबकि बड़े अमेरिकी युद्धपोतों को वहां तेज़ी से मुड़ने में मुश्किल होती है.
4. आंतरिक स्थिरता और स्थानीय स्तर पर विद्रोह-रोधी तैयारी
ओमान ने एक बहुत ही एकजुट सैन्य कमान (सुल्तान की सशस्त्र सेनाएं) बनाई है, जिसका रेगिस्तानी और पहाड़ी इलाकों में आंतरिक सुरक्षा, सीमा नियंत्रण और विद्रोह-रोधी अभियानों को सफलतापूर्वक संभालने का लंबा इतिहास रहा है. चूंकि इसकी सैन्य नीति पूरी तरह से रक्षात्मक और स्थानीय स्तर पर केंद्रित है, इसलिए ओमान यमन और सऊदी अरब के साथ अपनी सीमाओं पर बहुत ज़्यादा आंतरिक सामाजिक भरोसा और स्थिरता बनाए रखता है, बिना अपनी क्षमता से ज़्यादा विस्तार के जोखिम के. ओमान की सेना अपनी क्षेत्रीय रक्षा रणनीति के साथ-साथ यूरोफाइटर टाइफून और F-16 जैसे आधुनिक हार्डवेयर का इस्तेमाल कैसे करती है, इसे गहराई से समझने के लिए ओमान की सैन्य क्षमताओं पर यह जानकारी देखें. यह वीडियो सल्तनत की सेना की बनावट, हथियारों और रणनीतिक क्षेत्रीय ताकत के बारे में पूरी जानकारी देता है.


