पाकिस्तान की सैन्य राजधानी रावलपिंडी पिछले 36 घंटे से बरसात की वजह से डूबी हुई है, लाल बाजार से लेकर रावलपिंडी कैंट और रावलपिंडी-इस्लामाबाद एक्सप्रेसवे सब 4 फीट गहरी नदी में तब्दील हो चुका है. हर तरफ बस पानी ही पानी है.
पाकिस्तानी मौसम विभाग के आकड़ों के मुताबिक, रावलपिंडी में पिछले 36 घंटे में लगभग 140 mm बरसात हुई है, लेकिन इस 140 mm बरसात ने उस शहर की पोल खोल दी, जहां पर पाकिस्तानी सेना का वर्चस्व है. पाकिस्तान का सबसे बड़ा छावनी वाला शहर (Major Garrison City) भी है.
आलम ये है कि न्यू लालाजार में पानी ऐसा घुसा की गाड़ी डूब गई, जिसे निकालने की कोशिश की जा रही है, साथ ही कैंट के इलाके में लोग कमर तक पानी के बीच चल रहे हैं. पुलिस की गाड़ी बाजार से डूब कर निकल कर आ रही है और आम नागरिक सीने तक पानी में डूब कर साइकिल निकाल कर आ रहा है.

रावलपिंडी कैंट की शेर जमान कॉलोनी, राजा अकरम कॉलोनी, शालय घाटी कॉलोनी और पीपल्स कॉलोनी पानी में समा चुकी है और एक मंजिला घर तक डूब चुके हैं. राजा बाजार में पानी की रफ्तार लहरों के साथ डस्टबिन को अपने साथ लेकर जा रही है. नल्लाह लाई में पानी तेज रफ्तार में बह रहा है और आगे अन्य शहरों को डुबाने का काम करेगा.
पानी में डूबी मंजिल, पोर्श इलाकों में भरा पानी
इसी तरह टेंच भट्टा इलाके में पूरी एक मंजिल डूब चुकी है और पानी का सैलाब निकल रहा है. रावलपिंडी में बाढ़ का असर राजधानी इस्लामाबाद में भी देखा जा रहा है, जहां पोर्श F-10 सेक्टर तक सड़कों पर पानी भरा हुआ है. रावलपिंडी ऐसा शहर है जिसे पाकिस्तान में पिछले 8 दशक से सेना ही कंट्रोल कर रही है.
पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय (GHQ) भी इसी रावलपिंडी शहर में है, साथ ही पाकिस्तानी सेना के सर्विंग और रिटायर्ड अधिकारियों के मकान भी इसी रावलपिंडी शहर में है. रावलपिंडी में सिविक व्यवस्था जैसे नालों की सफाई करना, शहर के बाहर नालों का निर्माण करना, जलभराव से शहर को बचाना, इस सबकी जिम्मेदारी वाटर एंड सैनिटेशन एजेंसी (WASA) की है. इसका सालाना बजट 720 करोड़ पाकिस्तानी रुपये है. ये 720 करोड़ का बजट भी रावलपिंडी को डूबने से बचाने के लिए असफल रहा.

