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Us-iran Deal:अमेरिका-ईरान समझौते का मसौदा आया सामने, यूरेनियम से लेकर होर्मुज और लेबनान तक कई शर्तें शामिल – Us Draft Of Iran Agreement Includes Minimum Standard For Downblending Uranium Hormuz Issue Lebanon Invasion

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अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते के मसौदे की कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं। मसौदे में ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम, लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जैसे संवेदनशील मुद्दों को शामिल किया गया है। यह मसौदा दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


यूरेनियम को लेकर समझौते में क्या प्रावधान हैं?

समझौते के मसौदे में ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को कम संवर्धित स्तर पर लाने के लिए एक नया न्यूनतम मानक तय किया गया है। इसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को कम करना और परमाणु गतिविधियों पर अधिक निगरानी सुनिश्चित करना है। यह प्रावधान समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

लेबनान और होर्मुज को लेकर क्या शर्तें रखी गई हैं?

मसौदे में लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा सुनिश्चित करने का भी प्रावधान शामिल है। यह कदम लेबनान में हालिया सैन्य तनाव और इस्राइल की कार्रवाई के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर समझौते में केवल 60 दिनों तक बिना शुल्क के मार्ग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। हालांकि भविष्य में शुल्क लगाने की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है। ऐसे में यह प्रावधान अस्थायी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका-ईरान शांति समझौते के 14 प्रमुख बिंदु


  1. अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी इस युद्ध को तत्काल और स्थायी रूप से खत्म करने पर सहमत होंगे, जिसमें लेबनान जैसे सभी मोर्चे शामिल हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करेंगे और बल प्रयोग या उसकी धमकी से बचेंगे। लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित की जाएगी।

  2. दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे तथा आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

  3. दोनों पक्ष अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करने का प्रयास करेंगे। आपसी सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकेगा।

  4. समझौते पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी और अन्य बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा तथा 30 दिनों में इसे पूरी तरह समाप्त करेगा। अंतिम समझौते के बाद 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के निकटवर्ती क्षेत्रों से अपनी सेनाओं को हटाएगा।

  5. ईरान 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को बिना शुल्क सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। तकनीकी और सैन्य बाधाओं को हटाने तथा बारूदी सुरंगों की सफाई के बाद 30 दिनों में सामान्य यातायात बहाल किया जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रबंधन पर ईरान ओमान और अन्य तटीय देशों से बातचीत करेगा।

  6. अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना तैयार करेगा। इसकी कार्यप्रणाली अंतिम समझौते में तय की जाएगी।

  7. अमेरिका अंतिम समझौते के तहत ईरान पर लगाए गए विभिन्न प्रकार के प्रतिबंधों को समाप्त करने की दिशा में काम करेगा। दोनों पक्ष इस मुद्दे को वार्ता में प्राथमिकता देंगे।

  8. ईरान दोहराएगा कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही प्राप्त करेगा। संवर्धित यूरेनियम के भंडार के भविष्य को लेकर दोनों देश अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में सहमति आधारित व्यवस्था तैयार करेंगे। परमाणु संवर्धन और ईरान की परमाणु जरूरतों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

  9. अंतिम समझौते तक दोनों देश यथास्थिति बनाए रखेंगे। ईरान अपने मौजूदा परमाणु कार्यक्रम में बदलाव नहीं करेगा और अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा तथा क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल नहीं भेजेगा।

  10. समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद अमेरिका का वित्त मंत्रालय ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़ी सेवाओं के निर्यात के लिए आवश्यक छूट प्रदान करेगा।

  11. अमेरिका एमओयू लागू होने के बाद ईरान की जमी हुई या प्रतिबंधित निधियों और परिसंपत्तियों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने का वचन देगा। इन निधियों की रिहाई की प्रक्रिया दोनों देशों के बीच बातचीत से तय होगी।

  12. एमओयू और भविष्य के अंतिम समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा।

  13. एमओयू पर हस्ताक्षर और उसके कुछ प्रमुख प्रावधानों के लागू होने के बाद दोनों पक्ष अंतिम समझौते के अन्य बिंदुओं पर विशेष वार्ता शुरू करेंगे।

  14. अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से समर्थन दिया जाएगा।

 

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