आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सत्ता में बैठे लोगों की प्रतिबद्धता और देश के हर व्यक्ति के सहयोग से संभव हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र है।

यह कार्यक्रम डॉ हेडगेवार स्मारक समिति ने उन लोगों के सम्मान में आयोजित किया था, जिनके नेतृत्व में मंदिर का निर्माण हुआ। भागवत ने कहा कि मंदिर भगवान राम की अपनी इच्छा से बना है। उन्होंने इसकी तुलना गोवर्धन पर्वत उठाने से की। उन्होंने कहा कि जैसे भगवान कृष्ण की उंगली पर पर्वत टिका था, लेकिन उसे उठाने में सबका सहयोग लगा, वैसे ही राम मंदिर भी सबकी मदद से बना है।
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उन्होंने योगी अरविंद का जिक्र करते हुए कहा कि सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए भारत का उदय होना बहुत जरूरी है। उनके अनुसार, देश के पुनरुत्थान की यह प्रक्रिया 1857 में ही शुरू हो गई थी। 2014 के लोकसभा चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने लंदन के अखबार ‘द गार्डियन’ के एक लेख का हवाला दिया। उस लेख में कहा गया था कि भारतीयों ने आखिरकार अंग्रेजों को विदा कर दिया है। भागवत ने कहा कि तकनीकी रूप से हमने 1947 में आजादी पाई थी, लेकिन पूरी तरह यकीन अब हुआ है।
उन्होंने सवाल किया कि अगर सत्ता में बैठे लोग प्रतिबद्ध नहीं होते और इतना बड़ा आंदोलन नहीं होता, तो क्या मंदिर बन पाता? भागवत ने कहा कि पहले लोग ‘हिंदू राष्ट्र’ की बात पर हंसते थे, लेकिन आज वही लोग इसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे सूरज पूर्व से उगता है और इसे घोषित करने की जरूरत नहीं होती, वैसे ही भारत का हिंदू राष्ट्र होना एक सच्चाई है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण का काम पूरा हुआ, अब हमें देश को और अधिक समृद्ध और महान बनाने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का उदय पूरी दुनिया को बचाएगा।
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