भारतीय सेना के नए प्रमुख (थल सेनाध्यक्ष) जनरल धीरज सेठ ने गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। सेना प्रमुख का पद संभालने के बाद यह उनकी रक्षा मंत्री के साथ पहली औपचारिक बैठक थी। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए इसकी जानकारी दी। रक्षा मंत्री कार्यालय ने अपने पोस्ट में कहा कि थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने कर्तव्य भवन-2 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार मुलाकात की।

यह भी पढ़ें- Maharashtra: शरद पवार ने सचिन अहीर से फोन पर की बात, डिप्टी चेयरमैन बनने पर दी बधाई; सियासी चर्चाएं तेज
30 जून को संभाली थी सेना की कमान
जनरल धीरज सेठ ने 30 जून को भारतीय सेना के 31वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का स्थान लिया, जो 40 वर्ष से अधिक की सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। करीब 13 लाख सैनिकों वाली भारतीय सेना की कमान ऐसे समय में जनरल सेठ ने संभाली है, जब सेना सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ आत्मनिर्भर और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक सेना बनने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

पश्चिमी सीमा पर दो कमानों का नेतृत्व करने का अनुभव
जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्हें पश्चिमी मोर्चे पर दो अलग-अलग ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करने का दुर्लभ अनुभव हासिल है। उन्हें विभिन्न चुनौतीपूर्ण इलाकों में काम करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों का भी लंबा अनुभव है।
एनडीए के पूर्व छात्र हैं जनरल सेठ
जनरल सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। उन्हें दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कॉर्प्स में कमीशन मिला था। लगभग चार दशक के सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और अलग-अलग भौगोलिक एवं संघर्ष वाले क्षेत्रों में नेतृत्व किया।
यह भी पढ़ें- मुंबई में भारी बारिश का कहर: सांताक्रूज में पेड़ गिरने से आठ लोग घायल; पालघर में दीवार ढहने से महिला की मौत
गार्ड ऑफ ऑनर से किया गया सम्मानित
सेना प्रमुख का पद संभालने के एक दिन बाद, 1 जुलाई को दक्षिण ब्लॉक परिसर में आयोजित समारोह में जनरल धीरज सेठ को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना से सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने, आधुनिकीकरण को गति देने तथा स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसलों की उम्मीद की जा रही है।

