अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते का एलान करने के बाद ही एशियाई बाजार झूम उठे। जापान का निक्केई सूचकांक 4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इंट्राडे रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। शांति समझौते के एलान और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की खबर से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों में उछाल आया। दक्षिण कोरिया के कोस्पी सूचकांक में भी 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

बाजारों का कैसा रहा हाल?
ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार में भी खुलने के साथ ही तेजी दर्ज की गई। एएसएक्स200 125 अंकों के साथ बढ़कर 8928 पर कारोबार कर रहा था। सूचकांक के 11 में से सात क्षेत्रों में तेजी देखी गई। सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कच्चा तेल के वायदा भाव में 4.77 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 80.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। अगस्त में डिलीवरी के लिए ब्रेंट वायदा भाव में भी करीब 4 फीसदी की गिरावट आई और यह 83.77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
एसएंडपी 500 वायदा में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि नैस्डैक वायदा में 1.4 प्रतिश की तेजी आई है। निक्केई वायदा तेजी के बाद 68,685 के अंक तक पहुंच गया, जबकि शुक्रवार को यह 66,020 पर था। अमेरिकी शेयर बाजारों के संकेतक भी मजबूती दर्शा रहे हैं। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 1 प्रतिशत और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स में 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे वॉल स्ट्रीट में सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिले।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किया शांति समझौते का एलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर शांति समझौते का एलान करते हुए लिखा कि ‘ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है। सभी को बधाई। मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने की अनुमति देता हूं औऱ साथ ही अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक अवरोध को भी तुरंत हटाने की अनुमति देता हूं। विश्व के जहाजों, अपने इंजन चालू करो। तेल को बहने दो।’
ईरान ने भी की समझौते की पुष्टि
ईरान के कानून और उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी शांति समझौते की पुष्टि की। दोनों देशों के बीच 19 जून को जिनेवा में शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह शांति समझौता सिर्फ कूटनीति का परिणाम नहीं है बल्कि ईरान की सैन्य उपलब्धियों का भी कर्जदार है। इस शांति समझौते का साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भी अंत हो जाएगा और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी। 108 दिनों के बाद इस संघर्ष की समाप्ति से पूरी दुनिया भी राहत की सांस लेगी।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 3 डॉलर से ज्यादा की गिरावट आई। सोमवार के शुरुआती कारोबार में अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.45 डॉलर गिरकर 83.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड 3.95 डॉलर टूटकर 80.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम में भी गिरावट की उम्मीद की जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान से तेल बाजार को पूरी तरह स्थिर होने में अभी कई महीने लग सकते हैं। संघर्ष के दौरान तेल कीमतों में भारी उछाल आया था, जिससे पेट्रोल और अन्य कई उत्पादों की लागत बढ़ गई थी।

