तटीय इलाकों में यह चिंता और क्यों बढ़ जाती है?
कुछ पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि समुद्र के किनारे स्थित क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है।
उनके मुताबिक, यदि भूमिगत टैंकों की सील ठीक से बंद नहीं हो, तो सब-सॉयल वाटर भी E20 स्टॉक को प्रभावित कर सकता है।
एक पेट्रोल पंप संचालक ने यह आशंका भी जताई कि माइल्ड स्टील से बने भूमिगत टैंक और पाइपलाइन, इथेनॉल द्वारा पानी सोखने की प्रवृत्ति के कारण जंग के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इससे ईंधन के दूषित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
हालांकि, कुछ संचालकों ने यह भी बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने E20 की तैयारी के तहत पेट्रोल डिस्पेंसिंग यूनिट में लगी सील और वॉशर को नियोप्रीन रबर से बदल दिया है।
FADA ने इन दावों पर क्या कहा?
इससे पहले फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने E20 पेट्रोल में पानी मिलने से जुड़े दावों की तथ्य-जांच (फैक्ट-चेकिंग) की थी।

फाडा का कहना था कि यह दावा कि केवल E20 पेट्रोल में ही पानी की समस्या होती है, भ्रामक है।
संस्था के अनुसार-
-
इथेनॉल द्वारा नमी सोखना एक पहले से ज्ञात गुण है।
-
इसी को ध्यान में रखकर ईंधन के मानक, स्टोरेज व्यवस्था और वाहनों का डिजाइन तैयार किया जाता है।
-
भारत में उपलब्ध E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के तय मानकों का पालन करता है।
Myth: E20 causes water contamination unique to ethanol-blended petrol. ❌
Fact: Misleading. Ethanol’s moisture absorption is a known property accounted for in fuel standards, storage, and vehicle design. India’s E20 meets stringent BIS specifications.#FADA #E20 #MythVsFact pic.twitter.com/JPWXTAkxNx
— FADA (@FADA_India) July 11, 2026

