Debit Card: केरल के एक कंज्यूमर कोर्ट ने फेडरल बैंक को अपनी सर्विसेज को लेकर दोषी माना है. मामला एक ऐसे कस्टमर का है, जिसका इंटरनेशनल डेबिट कार्ड बैंक ने बिना बताए ब्लॉक कर दिया. जिसके कारण वो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कुवैत एयरपोर्ट की लाउंज सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर पाया. खास बात ये थी कि उसके बैंक खाते में पर्याप्त पैसा भी मौजूद था.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल मामले की शिकायत करने वाले पॉल साल 2015 से फेडरल बैंक के NRE ग्राहक हैं. बैंक ने उन्हें एक इंटरनेशनल डेबिट कार्ड दिया था, जिसकी वैधता दिसंबर 2023 तक थी. इस कार्ड पर घरेलू और इंटरनेशनल एयरपोर्ट लाउंज में फ्री एंट्री जैसी सुविधाएं मिलती थीं. वो 2018 से इस कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे. परिवार के साथ कुवैत से कोच्चि लौटते समय उन्होंने कुवैत एयरपोर्ट के इंटरनेशनल लाउंज में कार्ड का इस्तेमाल किया, लेकिन कार्ड से भुगतान नहीं हो पाया. स्क्रीन पर Card Failure का मैसेज दिखा. इसके बाद पॉल, उनकी पत्नी और बच्चों को लाउंज में प्रवेश नहीं मिल पाया.
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पॉल ने बताया कि उनके पास खाते में पर्याप्त पैसे थे, इसलिए उन्होंने ज्यादा नकद या कोई दूसरा पेमेंट मोड नहीं रखा था. अचानक कार्ड काम नहीं करने से उन्हें और उनके परिवार को विदेश में काफी परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा.
बैंक ने दी सफाई
इस मामले पर फेडरल बैंक ने बताया कि 10 अगस्त 2021 को मास्टर कार्ड से सुरक्षा संबंधी अलर्ट मिला था. इसमें आशंका जताई गई थी कि कार्ड की जानकारी से समझौता हो सकता है. बैंक ने कहा कि ग्राहक को धोखाधड़ी से बचाने के लिए कार्ड को ब्लॉक करना जरूरी था. बैंक का कहना था कि उन्होंने SMS के जरिए ग्राहक को इस बारे में बता दिया था.
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उपभोक्ता आयोग ने क्या कहा?
आयोग ने कहा कि पॉल ने नया कार्ड जारी करने की मांग नहीं की थी और न ही पुराने कार्ड को उसकी वैधता खत्म होने से पहले ब्लॉक करने की सहमति दी थी. बैंक ने भी ये साबित नहीं किया कि ग्राहक को भरोसेमंद तरीके से कार्ड ब्लॉक होने और नया कार्ड जारी किए जाने की जानकारी दी गई थी.
जिसके बाद आयोग ने बैंक को मानसिक परेशानी, कठिनाई और तनाव के लिए 1 लाख रुपये मुआवजा और 25,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया.


