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China Spy Camera:चीन में डिजिटल जाल से नहीं बच पाएंगे विदेशी नागरिक, 70 करोड़ कैमरों में कैद होगी हर गतिविधि – Foreign Nationals Not Able To Escape Chinas Digital Web Activity Captured By 700 Million Cameras

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चीन में विदेशी नागरिकों की निगरानी को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने ऐसा विशाल डिजिटल निगरानी नेटवर्क तैयार किया है, जो देश में मौजूद विदेशी नागरिकों की हर गतिविधि पर नजर रख रहा है। इस सिस्टम के जरिए लोगों की लोकेशन, आवाजाही, मोबाइल डाटा, सामाजिक संबंध और रोजमर्रा की गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है। बताया गया है कि चीन में 70 करोड़ से ज्यादा निगरानी कैमरे लगे हुए हैं और हर दो लोगों पर एक मॉनिटरिंग डिवाइस मौजूद है। इस खुलासे के बाद दुनिया में चीन की निगरानी व्यवस्था और प्रेस स्वतंत्रता को लेकर फिर बहस तेज हो गई है।

क्या है चीन का डायनमिक कंट्रोल प्लेटफॉर्म’?

रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने डायनमिक कंट्रोल प्लेटफॉर्म फॉर ओवरसीज पर्सनल नाम का एक बड़ा निगरानी सिस्टम तैयार किया है। यह सिस्टम सुरक्षा कैमरों, फेस रिकग्निशन तकनीक, वीजा रिकॉर्ड और मोबाइल डाटा को एक साथ जोड़कर विदेशी नागरिकों की गतिविधियों को ट्रैक करता है। दावा किया गया है कि इस प्लेटफॉर्म में लोगों के पासपोर्ट नंबर, जन्मतिथि, राष्ट्रीयता, नौकरी की जानकारी, चीनी मोबाइल नंबर और दूसरी निजी जानकारियां दर्ज रहती हैं। इतना ही नहीं, सिस्टम यह भी रिकॉर्ड करता है कि कौन किससे मिलता है, कौन किस इलाके में रहता है और किन लोगों के बीच संपर्क है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी पत्रकारों और “संवेदनशील” माने जाने वाले लोगों को विशेष निगरानी सूची में रखा जाता है।

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किन देशों के नागरिकों पर ज्यादा नजर रखी जा रही है?

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन खास तौर पर ‘फाइव आइज’ देशों के नागरिकों पर ज्यादा नजर रख रहा है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं। दावा किया गया है कि सिस्टम इन देशों के नागरिकों की मौजूदगी को शहरों से लेकर मोहल्लों और ब्लॉक स्तर तक ट्रैक करता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चीन के निगरानी नेटवर्क के कारण विदेशी दौरों और पत्रकारों की गतिविधियों पर पहले से ज्यादा नियंत्रण बढ़ गया है। कई विदेशी पत्रकारों को चीन में वीजा देने से भी इनकार किया गया। इनमें ट्रंप के दौरे को कवर करने वाले कुछ अमेरिकी पत्रकार भी शामिल बताए गए हैं।

कैसे सामने आई निगरानी नेटवर्क की तस्वीर?

रिपोर्ट में ब्रिटेन की पत्रकार सोफिया यान का भी जिक्र किया गया है। उन्होंने दावा किया कि वह इस डाटाबेस में अपनी निजी प्रोफाइल तक ढूंढने में सफल रहीं। उनके मुताबिक सिस्टम यह दिखा सकता है कि कौन किसका दोस्त, सहकर्मी या क्लासमेट है। यहां तक कि कौन किस इलाके में रहता है और किन लोगों को कैमरों में एक साथ देखा गया है। इससे साफ होता है कि चीन का निगरानी नेटवर्क सिर्फ लोगों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके सामाजिक रिश्तों और व्यवहार का भी पूरा रिकॉर्ड तैयार कर रहा है।

प्रेस स्वतंत्रता को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन दुनिया में पत्रकारों को सबसे ज्यादा जेल में डालने वाले देशों में शामिल है। बताया गया कि 116 मीडिया प्रोफेशनल्स जेल में हैं। इसी वजह से वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में चीन को सबसे खराब देशों में गिना गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्वतंत्र मीडिया संस्थानों को चीन में आने से रोका गया और विदेशी पत्रकारों पर लगातार दबाव बनाया गया। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तकनीक और सुरक्षा के नाम पर लोगों की निजी जिंदगी पर जरूरत से ज्यादा नजर रखी जा रही है।

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